नियोजन नीति के विरोध में छात्रों के झारखंड बंद का गिरिडीह में रह मिला जुला असर

 

◆सुबह सुबह सड़क पर उतर छात्र आवागमन किया बाधित, बाजार बंद करवाने का भी किया प्रयास

गिरिडीह : नियोजन नीति के विरोध में छात्र संगठनों द्वारा आहूत झारखंड बंद का गिरिडीह में मिलाजुला असर देखने को मिला। स्कूल कॉलेज, कल कारखाने आम दिनों की तरह खुली रही। बाजार पर भी बंदी कोई असर नहीं दिखा। रोज की तरह सभी दुकानें खुली रही। सड़क पर भीड़ भीड़ आम दिनों के ही तरह देखने को मिली। वहीं फुटपाथ पर फल सब्जी विक्रेताओं की ठेला आम दिनों की तरह लगी रही। कुल मिलाकर कहें तो बाजार पर इस बंद का कोई असर नहीं दिखा। सड़कों पर छोटी बड़ी सभी वाहनों दुपहिया, चारपहिया आम दिनों की तरह चलती रही। वहीं गिरिडीह बस पड़ाव से लंबी दूरी के वाहनों का परिचालन बंद रहा। जबकि छोटी दूरी के वाहनों का परिचालन जारी रहा।

हालांकि बंद के समर्थन में छात्र संगठनों के सदस्य बुधवार सुबह सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करते दिखे। प्रदर्शनकारी छात्र हाथों में तख्तियां लिये झारखण्ड सरकार द्वारा बनाये गए नियोजन नीति के खिलाफ जमकर नारेबाजी किया। वहीं प्रदर्शनकारी छात्र गिरिडीह – देवघर मुख्य मार्ग पर आवागमन बाधित करने की नियत से सर जेसी बोस स्कूल के समीप सड़क पर बैठ मुख्य सड़क को जाम कर दिया। जिस कारण गिरिडीह- देवघर मुख्यपथ पर दोनों और वाहनों की लंबी कतार लग गयी। सड़क जाम की सूचना पर डीएसपी मुख्यालय संजय राणा, नगर थाना प्रभारी आरएन चौधरी सदलबल मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी छात्रों को समझाने का प्रयास करते दिखे।इस दौरान छात्र संगठनों की रैली ने पूरे शहर का चक्कर लगाया। छात्रों के प्रदर्शन के कारण शहर में जगह-जगह जाम लग गया। लेकिन मौके पर मुस्तेद रहे पुलिस पदाधिकारियों ने तुरंत ही जाम हंटवाने में सफल रहे।

बता दें कि झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन ने बुधवार को वर्तमान नियोजन नीति का विरोध में झारखंड बंद बुलाया है। छात्र यूनियन राज्य में चल रही नियोजन नीति का विरोध कर रही है और 1932 आधारित खतियान नीति लागू करने की मांग कर रही है। वहीं छात्रों के इस बंद के मद्देनजर पुलिस-प्रशासन काफी अलर्ट दिखी। जगह जगह पर पुलिस काफी मुस्तेद दिखी। प्रदर्शनकारी छात्र बाजार बंद करवाने को भी निकले लेकिन पुलिस प्रशासन की मुस्तेदी से बाजार पर इस बंद का कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि सरकार ने जो नई नियोजन नीति लाई है उसमें प्रदेश की नौकरियों में नियुक्ति के लिए 60-40 का अनुपात लागू किया गया है। अर्थात 40 प्रतिशत पदों पर झारखंड के बाहर के राज्यों के अभ्यर्थियों का कब्जा हो जाएगा। जबकि हम छात्रों का मांग है कि राज्य के तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियां इस प्रदेश के मूल निवासी युवाओं के लिए आरक्षित किया जाय। ताकि झारखण्ड के मूल वासियों को नौकरी प्राप्तन्हों सके।

 

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