बहुमत न मिलने पर तुर्की में दोबारा होगा राष्ट्रपति पद का चुनाव, भारत विरोधी एर्दोगन को कमाल केलिकदारोग्लू ने रोका

अंकारा

तुर्की में दोबारा राष्ट्रपति पर के चुनाव होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। क्योंकि वोटों की गिनती में कोई भी उम्मीदवार 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करता दिखाई नहीं दे रहा है। प्राप्त समाचारों के अनुसार अनादोलू के शुरूआती परिणामों में तुर्की के मौजूदा राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन विपक्षी प्रतिद्वंद्वी केमल किलिकडारोग्लू की तुलना में आगे हैं, लेकिन अंतर कम हो गया है। अनादोलु ने बताया, अधिकांश मतों की गिनती होने पर एर्दोगन को 49.67 प्रतिशत मत प्राप्त हुए, जब 93 प्रतिशत मतपत्रों की गिनती की गई, जबकि विपक्ष के नेता केमल किलिकडारोग्लू के लिए 44.59 प्रतिशत वोट मिले। तीसरे उम्मीदवार सिनान ओगन को 5.3 प्रतिशत वोट मिला। यदि किसी भी उम्मीदवार ने पहले दौर में साधारण बहुमत या 50 प्रतिशत वोट हासिल नहीं किए, तो 28 मई को शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच दोबारा मतदान होगा। उधर, संसदीय चुनाव के लिए मतों की गिनती भी पूरी हो रही है। अनौपचारिक परिणामों से पता चला कि एर्दोगन की सत्तारूढ़ जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एकेपी), नेशनलिस्ट मूवमेंट पार्टी (एमएचपी), न्यू वेलफेयर पार्टी और ग्रेट यूनियन पार्टी द्वारा गठित पीपुल्स एलायंस के 323 प्रतिनिधि चुने गए हैं। यह 600 सीटों वाली संसद के लिए तीन गठबंधनों में सबसे अधिक है। छह-दलीय विपक्षी ब्लॉक नेशन एलायंस ने 214 सीट हासिल किया है। वर्तमान कार्यकारी राष्ट्रपति पद को समाप्त करने के लिए जनमत संग्रह कराने के लिए आवश्यक 360 सीटों को हासिल नहीं किया जा सका है।

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