अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद, झारखंड प्रदेश ने आज ” संस्कृत दिवस ” धूमधाम से मनाया

आज दिनांक 31 अगस्त (गुरुवार) को अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद, झारखंड प्रदेश के तत्वाधान में स्थानीय संस्कृत महाविद्यालय, किशोरगंज, रांची के सभागार में ” संस्कृत दिवस ” धूमधाम से मनाया गया।

इस समारोह के मुख्य अतिथि संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ० राम नारायण पंडित, विशिष्ट अतिथि संस्कृत महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ० शैलेश कुमार मिश्र, प्रसिद्ध समाजसेवी सह निवर्तमान वार्ड 26 के पार्षद अरूण कुमार झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित एवं मां जानकी के चित्र पर माल्यार्पण कर इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। शुभारंभ में सामूहिक रूप से ” जय जय भैरवी असुर भयाउनि , पशुपति भामिनी माया। ” तत्पशचात अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद, झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष अमरनाथ नाथ झा ने स्वागत भाषण दिये , जबकि सभी आगंतुकों का स्वागत सह मंच का संचालन अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद, झारखंड प्रदेश के महासचिव अजय झा ने किया।इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी सह विद्यापति स्मारक समिति के अध्यक्ष लेखानंद झा, बाबा विद्यापति स्मारक समिति के कार्यकारी अध्यक्ष जयंत कुमार झा, कोशी सी0मि0मै0मंच के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा, डॉo सत्य प्रकाश मिश्र, राष्ट्रीय युवा मैथिली मंच के अध्यक्ष अवधेश कुमार ठाकुर, आशुतोष द्विवेदी ने संस्कृत भाषा को बोलने एवं भाषा बचाने पर विचार दिए।

विशिष्ट अतिथि संस्कृत महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ० शैलेश कुमार मिश्र ने झारखंड में संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की बात कहे। समाजसेवी सह निवर्तमान वार्ड 26 के पार्षद अरूण कुमार झा ने मैट्रिक बोर्ड में संस्कृत विषय को अनिवार्य करने के लिए कहा । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्कृत महाविद्यालय किशोरगंज,रांची के प्रार्चाय डॉ० राम नारायण पंडित ने प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर विधालय में संस्कृत विषय को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए जिससे प्रारम्भिक शिक्षा से ही संस्कृत भाषा पर छात्र – छात्रों की प्रति जागरूक होगी।

अन्त में धन्यवाद ज्ञापन अ.मै.परि., प्रदेश कोषाध्यक्ष बिलट पोद्दार ने किया।
इस अवसर पर गोपाल ठाकुर ,भुवन किशोर झा, डॉ० संजय कुमार, सुधीर कुमार ठाकुर, जितेन्द्र कुमार,अभिषेक कुमार झा, प्रवेश पाण्डेय, गजेन्द्र पाण्डेय, आद्या चरण झा, एवं कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यक्रम का समापन प्रार्थना ” भगवान ! हमर ई मिथिला सुख शान्ति केर घर हो ” से हुआ।

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