राधा कृष्ण की होली। राधा जी कहतीं हैं कि मैं साँवरे के साथ होली नहीं खेलूँगी। वह मेरी गगरी फोड़ देता है, मेरी बाँह मरोरता…
View More साँवरे संग मैं खेलूँ न होरी….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रMonth: February 2025
न खेलूँ साँवरे होली…..ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
कान्हा राधा को होली खेलने के लिए बुलाते हैं, राधा कहतीं हैं कि हे साँवरिया तुम मुझे क्यूँ बुलाते हो मैं तुम्हारे साथ होली नहीं…
View More न खेलूँ साँवरे होली…..ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रचलो री सजनी देखन गौरी दुलहवा…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
जब सखियों ने सुना कि विचित्र बारात सजा कर पार्वती का दुल्हा आया है तो कहतीं हैं कि चलो पार्वती का दुल्हा देखने और शिव…
View More चलो री सजनी देखन गौरी दुलहवा…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रआरति लागे हो ए लला रउरी आरति लागे ….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
—–आरती —– आरति लागे हो ए लला रउरी आरति लागे । राम जी की लागे भरत जी की लागे, लखन सहित रिपूसूदन की । रउरी…
View More आरति लागे हो ए लला रउरी आरति लागे ….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रआयो बनवाँ से राम लखन और सिया…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रभु श्री राम बन से अयोध्या लौट आए हैं । अवध को पूरी तरह से सजा दिया गया है । सखियाँ मंगल गीत गा रही…
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प्रभु श्रीराम वनवास की अवधि पूर्ण कर अयोध्या लोट आए हैं। तुरंत उनका राज्याभिषेक हुआ। अयोध्या में उत्सव मनाया जा रहा है। अवधवासियों के आनन्द…
View More राम अवध में आए सुनो मोरे भैया…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रभज मन राम चरन चित लाई…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रस्तुत है प्रभु श्रीराम के चरणकमल की वन्दना मेरी रचना के माध्यम से :—–. भज मन राम चरन चित लाई । भज मन राम चरन………..…
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बड़े भाग्य से यह मनुष्य शरीर मिलता है पर मनुष्य इस संसार में आकर भोग विलास में डूब जाता है और प्रभु को भूल जाता…
View More कि आरे भाई राम नाम सुखदाई…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रमूरारी गिरवरधारी राखो लाज हमारी…..- ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
द्रौपदी के चीरहरण पर प्रस्तुत है मेरी ये रचना:—-. मूरारी गिरवरधारी राखो लाज हमारी । हो मूरारी गिरवरधारी राखो……… बीच सभा में देखो दुष्ट दुशासन,…
View More मूरारी गिरवरधारी राखो लाज हमारी…..- ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रऐ हनुमत तोह से उरिन हम नाहीं……-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
लंका युद्ध समाप्त होने के पश्चात् प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी को हृदय से लगा कर कहा कि हे हनुमान जगत में तुम्हारे समान मेरा…
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