– विजय कुमार झा वरिष्ठ पत्रकार, बोकारो (झारखंड)। एक पुरानी कहावत है कि पाप का घड़ा चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो,…
View More बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति का अवसान और अहंकार का महा-पतनCategory: Literature
वर्दी के भीतर कैद आदमी
– पूर्णेन्दु पुष्पेश बताते चलूँ कि मैं एक सरकारी विभाग में कार्यरत हूँ; वह भी ऐसा विभाग जहाँ काम कम और “काम का दबाव” ज्यादा…
View More वर्दी के भीतर कैद आदमीहास्य-व्यंग्य : भगवान करे मेरे ख़ानदान में पप्पू पैदा न हो!
– पूर्णेन्दु पुष्पेश भगवान करे मेरे ख़ानदान में पप्पू पैदा न हो! यह कोई व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं है, न ही किसी नवजात के भविष्य को कोसने…
View More हास्य-व्यंग्य : भगवान करे मेरे ख़ानदान में पप्पू पैदा न हो!व्यंग्य : आया मौसम फिर ‘फरारी’ का
– पूर्णेन्दु पुष्पेश. गणतंत्र दिवस आते ही देश में एक अनोखा मौसम दस्तक देता है। न ठंड का, न गर्मी का…यह मौसम है विज्ञापन-फरारी का।…
View More व्यंग्य : आया मौसम फिर ‘फरारी’ काजड़ों से जुड़ती नई पीढ़ी ही भारत का भविष्य
– पूर्णेन्दु पुष्पेश भारत आज जिस मोड़ पर खड़ा है, वहां सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि हमारे पास कितनी तकनीक है या हमारी…
View More जड़ों से जुड़ती नई पीढ़ी ही भारत का भविष्यअसफलता पराजय नहीं है -यह समझना आवश्यक है
– पूर्णेन्दु ‘पुष्पेश’ आज पचपन वर्ष की उम्र पार करने के बाद यह बात जितनी स्पष्ट और गहरी समझ में आती है, काश उतनी ही…
View More असफलता पराजय नहीं है -यह समझना आवश्यक है‘अतीत से सीखो, वर्तमान को जियो’-अतीत की भूलों से सबक लेकर बनेगा सशक्त भारत
– पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ (स्वतंत्रता दिवस विशेष ) आज़ाद भारत की कहानी जितनी प्रेरक है, उतनी ही पेचीदा भी। जब 15 अगस्त 1947 को…
View More ‘अतीत से सीखो, वर्तमान को जियो’-अतीत की भूलों से सबक लेकर बनेगा सशक्त भारत‘उमेद’ (भोजपुरी कविता) — पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश’
‘उमेद’(भोजपुरी कविता) ई आखिर कवन चीज़ के — तोर-मोर?केकरा से — तोर-मोर?! एक्के अंगना में खेललऽ,एक्के अंगना में पललऽ,सनातन से इहे माटी में बढ़लऽ!आ आज…
View More ‘उमेद’ (भोजपुरी कविता) — पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश’प्रेमचंद की मूछें…— डॉ. प्रशांत करन
आज हिंदी के कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद @ धनपत राय श्रीवास्तव की जन्म जयंती मनाई जा रही है। आज उनकी अधिकतर छवि श्वेत कुर्ते में…
View More प्रेमचंद की मूछें…— डॉ. प्रशांत करनबंटवारा माता–पिता का….– डॉ. प्रशान्त करण
स्वामी राजेशानंद का प्रवचन चल रहा था। स्वामी कह रहे थे—”सुनो भक्तों! कल रात ही स्वप्न में मुझे नारद जी एक प्रसंग सुना गए हैं।…
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