राजा दशरथ के चारों पुत्र आँगन में खेल रहे हैं। प्रस्तुत है भोजपुरी में मेरी ये रचना जिसमें मैने उनकी शोभा का वर्णन किया है :——.
दशरथ के चारो ललनवाँ ,
अंँगनवाँ शोभे ।
लाली लाली अँखिया प्रभु के ,
साँवली सूरतिया शोभे ।
लाले लाले कोमल बा चरनवाँ ,
अंँगनवाँ शोभे ।
दशरथ के चारो ललनवाँ…….
पीत पीताम्बर शोभे,
हथवा धेनुहिया शोभे ।
लिलरा पर शोभेला चन्दनवाँ ,
अंँगनवाँ शोभे ।
दशरथ के चारो ललनवाँ……
कानों में कुंडल शोभे,
कटि करधनियाँ शोभे ।
रुनु झुनू बाजेला पैजनियाँ ,
अंँगनवाँ शोभे ।
दशरथ के चारो ललनवाँ…….
राजदुअरिया शोभे ,
अवध नगरिया शोभे ।
शोभेला दशरथ के भवनवाँ ,
अंँगनवाँ शोभे ।
दशरथ के चारो ललनवाँ…….
रचनाकार :

ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

