पिया बिनु बीते नहीं दिन रैन………..-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

सावन का महीना, पति परदेश, एक विरहन प्रियतम के विरह में व्याकुल भगवान कृष्ण से अपनी विरह वेदना सुनाते हुए विनती कर रही है कि हे कृष्ण मुझे मेरे पति से मिला दो। इसी प्रसंग पर प्रस्तुत है मेरी ये रचना :———

पिया बिनु बीते नहीं दिन रैन ।
सावन मास पिया परदेसे ,
केहि विधि आवत चैन ।
पिया बिनु बीते नहीं………..
बदरा गरजे बिजुरी चमके ,
घन घमंड नभ मेघा बरसे ,
जियरा भयो बेचैन ।
पिया बिनु बीते नहीं………..
नाचत चातक मोर चकोरा ,
मारत पूरबी पवन झकोरा ,
बरसत झर झर नैन ।
पिया बिनु बीते नहीं………..
बिरहन एक बिरह की मारी ,
राधामोहन शरन तुम्हारी ,
पियहिं देखावहु नैन ।
पिया बिनु बीते नहीं………..
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रचनाकार :

ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र