यह समय राष्ट्रवाद-जाप का नहीं -मुखर राष्ट्रवाद का है

Not a Time to Whisper Patriotism; But to Declare Vocal Nationalism – Purnendu Pusspesh (Editor)

 

राष्ट्र चिंतन से राष्ट्र निर्माण तक -यह केवल एक विचार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन है। आज जब वैश्विक परिस्थितियाँ तेज़ी से बदल रही हैं और विचारों की लड़ाइयाँ सीमाओं पर नहीं बल्कि दिमाग़, मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लड़ी जा रही हैं -तब राष्ट्र के प्रति सजगता और जिम्मेदारी पहले से अधिक अनिवार्य हो गई है। राष्ट्रवाद केवल भावनाओं की लहर नहीं -यह कर्तव्य, चेतना और कर्म का संतुलित संगम है। और जब यही राष्ट्रभाव मुखर होता है, तो वह केवल दिलों में नहीं, बल्कि निर्णयों में, नीतियों में और व्यक्तित्व के संस्कार में दिखता है।

‘मुखर राष्ट्रवाद’ उसी विचारधारा का नाम है -जो स्पष्ट है, सजग है और समर्पित है। हम केवल दर्शक नहीं, बल्कि राष्ट्र के सक्रिय सहभागी हैं। प्रश्न यह नहीं कि देश हमारे लिए क्या कर रहा है—बल्कि यह कि हम इस मातृभूमि के लिए क्या कर रहे हैं। विचार तभी सार्थक हैं जब वे कर्म में बदलते हैं, और कर्म तभी प्रभावी हैं जब उनमें राष्ट्र निर्माण का संकल्प हो।

आज आवश्यकता है – Think Bold. Speak Bold. Rise and Save the Nation.

बोल्ड होकर सोचना जरूरी है, क्योंकि परिवर्तन की पहली चिंगारी विचार में जन्म लेती है। बोल्ड होकर बोलना आवश्यक है, क्योंकि सत्य अक्सर समाज के शोर में दब जाता है। और एक सशक्त राष्ट्र के लिए उठ खड़ा होना इसलिए अनिवार्य है, क्योंकि राष्ट्र केवल नक्शा नहीं—यह सभ्यता, संस्कृति, भाषा, विरासत और बलिदानों से बना जीवंत अस्तित्व है। यह हमारी पहचान है। हमारी आत्मा है।

राष्ट्रवाद का अर्थ केवल उत्साह, नारों और तात्कालिक भावनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह विवेकपूर्ण प्रयास, तार्किक सोच और भारतीय दृष्टि से जुड़ा व्यवहार है। संयमित, विचारशील और सजग राष्ट्रवाद ही समाज को जोड़ता है और राष्ट्र को आगे बढ़ाता है। बिना समझ की आक्रामकता और बिना साहस की विनम्रता—दोनों ही राष्ट्रहित के विरुद्ध हैं।

आज समय केवल राष्ट्रभक्ति का नहीं बल्कि राष्ट्र-जिम्मेदारी का है। इस जिम्मेदारी में प्रत्येक नागरिक की भूमिका है; चाहे वह किसान हो या शिक्षक, पत्रकार हो या सैनिक, उद्योगपति हो या विद्यार्थी। हर आवाज़ भविष्य के भारत की कहानी लिख रही है। हर विचार राष्ट्र की दिशा तय कर रहा है। हर कर्म इतिहास रच रहा है।

और हाँ! राष्ट्रबोध के साथ शत्रुबोध भी नितांत आवश्यक है। जो राष्ट्र अपने अस्तित्व के खिलाफ़ काम करने वाली विचारधाराओं, शक्तियों और षड्यंत्रों को पहचान नहीं पाते, वे इतिहास में मिट जाते हैं। और भारत मिटने की परंपरा वाला राष्ट्र नहीं -जागने, लड़ने और विजय की परंपरा वाला राष्ट्र है।

भारत केवल भू-भाग नहीं;यह संकल्प है। यह संस्कृति है। यह धरोहर है। यह कर्तव्य और स्वाभिमान का पवित्र संगम है। जब हम इसके लिए सोचते हैं, बोलते हैं और कार्य करते हैं; तब राष्ट्र केवल सुरक्षित नहीं होता, वह पुनः जागृत होता है।

यही चेतना, यही दृष्टि और यही संकल्प मुखर राष्ट्रवाद है।
राष्ट्र चिंतन से राष्ट्र निर्माण तक -यह यात्रा अब केवल विचार की नहीं, कर्तव्य की है। यह हम सबकी है।

इसी अभियान के निहितार्थ ,  राष्ट्रीय मुख्यधारा दैनिक ‘मुखर राष्ट्रवाद’ एक स्थाई स्तम्भ आरम्भ कर रहा है। प्रबुद्ध राष्ट्रवादियों से अनुरोध है कि आपके सम्बंधित आलेख ,  विचार और टिप्पणियां ‘मुखर राष्ट्रवाद’ में प्रकाशनार्थ भेजें। 

 

 

 

 

 

 

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