राजमहल/साहिबगंज: राजमहल लोकसभा क्षेत्र से सांसद विजय कुमार हांसदा का सुप्रिया मुर्मू के साथ विवाह संपन्न हो गया। नवदंपति को विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ समर्थकों ने शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना की।
इसी बीच सांसद के विवाह के बाद सोशल मीडिया पर अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षण, धर्मांतरण और डीलिस्टिंग को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोगों ने दावा किया कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाकर अपनी पारंपरिक आदिवासी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन नहीं करता, तो उसे अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक लाभ मिलने पर पुनर्विचार होना चाहिए। ऐसे लोगों ने इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के निर्णयों का हवाला देते हुए डीलिस्टिंग की मांग को भी दोहराया।

हालांकि, यह भी उल्लेखनीय है कि भारत में वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था के तहत केवल ईसाई धर्म अपनाने मात्र से किसी अनुसूचित जनजाति व्यक्ति का एसटी दर्जा स्वतः समाप्त नहीं होता। इस विषय पर डीलिस्टिंग की मांग लंबे समय से सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही है, लेकिन इस संबंध में कोई ऐसा कानून लागू नहीं हुआ है जो धर्म परिवर्तन के आधार पर एसटी दर्जा स्वतः समाप्त कर दे।
फिलहाल सांसद विजय कुमार हांसदा या उनके कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया पर उठाए गए इन सवालों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

