राधा और कृष्ण का प्रेम मन और वाणी से परे है। इसका कोई वर्णन नहीं कर सकता। जिस मुरली की तान सुनकर राधा सुधबुध खो…
View More कन्हैया तेरी मुरली शौतन भई….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रAuthor: admin
भूल न जाना प्रभु मैं सेवक तुम्हारा …-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
एक भक्त की भावना। भक्त कहता है कि हे प्रभु! मैं तो आपका सेवक हूँ, मुझे कभी भूलियेगा नहीं। आपके सिवा मेरा कोई सहारा नहीं…
View More भूल न जाना प्रभु मैं सेवक तुम्हारा …-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रभजले नाम उदार…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
भजले नाम उदार — दुर्लभ पावन नर तन पाया, जनम अकारथ यूँहिं गंवाया। अन्त समय जब आया बन्दे, सिर धुनि धुनि पछताया। जो भी कछु…
View More भजले नाम उदार…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रतू निर्मोही कहाँ छुपे हो….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
तू निर्मोही कहाँ छुपे हो ?– प्रेम के रस में पगे ये नैना, प्रभु दर्शन को तरस रहे हैं। तू निर्मोही कहाँ छुपे हो ?…
View More तू निर्मोही कहाँ छुपे हो….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रसिया सजना के संग में…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
जब विवाह के पश्चात् सीता जी विदा होने लगीं तो वहाँ ऐसा कारुणिक दृश्य उपस्थित हो गया कि मनुष्य की कौन कहे पशु पक्षी भी…
View More सिया सजना के संग में…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रनाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारि….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रस्तुत है शरणागत भजन के रूप में मेरी ये रचना:—— नाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारि , नाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारी । मैं…
View More नाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारि….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रश्री गणेश वन्दना….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
श्री गणेश वन्दना:—– जय गणेश गजबदन विनायक । जय जय जय हो जय गणनायक ।। शंकर सुवन भवानी नन्दन । काम क्रोध मद लोभ निकन्दन…
View More श्री गणेश वन्दना….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रमिर्जाचौकी हाट की बंदोबस्ती 13.5 लाख में, मंडरो हाट की बोली मेरी मुर्मू ने जीती
– करण बने मिर्जाचाैकी हाट 13,लाख 50 हजार में हुई बंदोबस्ती – मेरी मुर्मू बनी मंडराे हाट की बोली। 1लाख 25 हजार मैं हुई बंदोबस्ती…
View More मिर्जाचौकी हाट की बंदोबस्ती 13.5 लाख में, मंडरो हाट की बोली मेरी मुर्मू ने जीतीकन्हैया संग होली खेलो री सखी…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रस्तुत है मेरी रचना राधा कृष्ण की होली:—– कन्हैया संग होली खेलो री सखी, खेलो री सखी होली खेलो री सखी, कन्हैया संग होली… मलि…
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प्रस्तुत है मेरी रचना ब्रज की होली :——- आज बिरज लाले लाल भयो रसिया । खेलत फाग बिरज नर नारी, उड़त अबीर गुलाल मोरे रसिया…
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