बोकारो प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल, पत्रकारों ने किया प्रेस वार्ता का बहिष्कार

बोकारो :
चास नगर निगम चुनाव 2026 के दौरान बोकारो प्रशासन की एक और “ढुलमुल व्यवस्था” सामने आई, जिसने न सिर्फ पत्रकारों को असहज किया, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए। 7 फरवरी को मेयर प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटन के अवसर पर निर्वाची पदाधिकारी सह एसडीओ, चास द्वारा पत्रकार सम्मेलन की सूचना सुबह 11:30 बजे एसडीओ कार्यालय सभाकक्ष में दी गई। सूचना मिलते ही पत्रकार समय से पहले पहुंच गए, लेकिन वहां पहुंचकर जो व्यवहार मिला, वह किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं कहा जा सकता।

सभाकक्ष में प्रतीक्षा कर रहे पत्रकारों को यह कहकर बाहर कर दिया गया कि पहले मेयर प्रत्याशियों के साथ बैठक होगी, पत्रकार सम्मेलन “बाद में” होगा। यह ‘बाद में’ कब होगा, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी देना भी प्रशासन ने जरूरी नहीं समझा। सवाल स्वाभाविक है -यदि पहले बैठक ही करनी थी, तो पत्रकारों को बुलाया ही क्यों गया? क्या पत्रकारों का समय, सम्मान और पेशेवर गरिमा प्रशासन की नजर में कोई मायने नहीं रखती?

इस रवैये से आहत पत्रकारों ने सामूहिक रूप से प्रेस वार्ता का बहिष्कार कर दिया। यह कोई तात्कालिक नाराज़गी नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ प्रतिक्रिया थी, जिसमें पत्रकारों को जब चाहो बुला लेने और जब चाहो लौटा देने की प्रवृत्ति दिखती है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ ऐसा व्यवहार न तो प्रशासन की गरिमा बढ़ाता है और न ही व्यवस्था पर भरोसा कायम करता है।

क्या निर्वाची पदाधिकारी सह एसडीओ, चास के काम करने में प्लानिंग की मुश्किलें हैं या क्या चुनाव कराने का अतिरिक्त कार्य ओवरलोड हो गया है ?

अब सवाल बोकारो उपायुक्त से है। क्या प्रशासन निरंकुश होकर मनमानी कर रहा है, या फिर सचमुच पत्रकारों के सम्मान को लेकर गंभीर नहीं है? उपायुक्त को चाहिए कि इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लें, सिस्टम में सुधार करें और ऐसे अधिकारियों की नब्ज कसें, जो लापरवाही और अहंकार के साथ काम कर रहे हैं। पत्रकारों को शहर के अंतिम छोर पर बुलाकर बेरंग लौटा देना किसी के लिए भी अच्छा अनुभव नहीं रहा। यदि प्रशासन सच में पारदर्शिता और संवाद चाहता है, तो उसे पहले अपने व्यवहार और कार्यशैली में सुधार लाना होगा।