एक भक्त की भावना। भक्त कहता है कि हे प्रभु! मैं तो आपका सेवक हूँ, मुझे कभी भूलियेगा नहीं। आपके सिवा मेरा कोई सहारा नहीं…
View More भूल न जाना प्रभु मैं सेवक तुम्हारा …-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रCategory: DHARM
भजले नाम उदार…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
भजले नाम उदार — दुर्लभ पावन नर तन पाया, जनम अकारथ यूँहिं गंवाया। अन्त समय जब आया बन्दे, सिर धुनि धुनि पछताया। जो भी कछु…
View More भजले नाम उदार…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रतू निर्मोही कहाँ छुपे हो….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
तू निर्मोही कहाँ छुपे हो ?– प्रेम के रस में पगे ये नैना, प्रभु दर्शन को तरस रहे हैं। तू निर्मोही कहाँ छुपे हो ?…
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जब विवाह के पश्चात् सीता जी विदा होने लगीं तो वहाँ ऐसा कारुणिक दृश्य उपस्थित हो गया कि मनुष्य की कौन कहे पशु पक्षी भी…
View More सिया सजना के संग में…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रनाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारि….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रस्तुत है शरणागत भजन के रूप में मेरी ये रचना:—— नाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारि , नाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारी । मैं…
View More नाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारि….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रश्री गणेश वन्दना….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
श्री गणेश वन्दना:—– जय गणेश गजबदन विनायक । जय जय जय हो जय गणनायक ।। शंकर सुवन भवानी नन्दन । काम क्रोध मद लोभ निकन्दन…
View More श्री गणेश वन्दना….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रकन्हैया संग होली खेलो री सखी…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रस्तुत है मेरी रचना राधा कृष्ण की होली:—– कन्हैया संग होली खेलो री सखी, खेलो री सखी होली खेलो री सखी, कन्हैया संग होली… मलि…
View More कन्हैया संग होली खेलो री सखी…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रआज बिरज लाले लाल भयो रसिया….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रस्तुत है मेरी रचना ब्रज की होली :——- आज बिरज लाले लाल भयो रसिया । खेलत फाग बिरज नर नारी, उड़त अबीर गुलाल मोरे रसिया…
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ऋतु बसन्त—— देखो ऋतु बसन्त आया है, कैसा मधुमय साज सजाए । सरसों ओढ़ी पीलि चुनरिया, लहर लहर लहराए । कोयल गावै राग बसन्ती, भँवरों…
View More देखो ऋतु बसन्त आया है…- ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रतुम्हारा स्वागत है ऋतुराज….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
स्वागत है ऋतुराज—— तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज । ओढ़ चुनरिया पीली सरसों, नाच रही है आज । अम्बुआ ऊपर छाये मंजरी, सजी है मधुमय साज…
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