दोबारा भरोसा या नई शुरुआत? चास की जनता के सामने विकल्प

— पूर्णेन्दु ‘पुष्पेश’ चास नगर निगम चुनाव इस बार सत्ता लोलुपता की सीमाएँ पार कर रहा है। 30 से ज्यादा नए-पुराने घड़े अपनी चमक दिखाने…

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संवरता झारखण्ड: सुरक्षा, जल और स्वास्थ्य में समन्वित विकास की नई पटकथा

– पूर्णेन्दु पुष्पेश  झारखण्ड लंबे समय तक संसाधनों से समृद्ध लेकिन संरचनात्मक चुनौतियों से जूझता राज्य माना जाता रहा है। खनिज संपदा, जल संसाधन और…

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आत्मनिर्भरता से क्रिएटिव शक्ति तक: बजट 2026–27 का बड़ा संदेश

– पूर्णेन्दु पुष्पेश   केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत वित्त वर्ष 2026–27 का बजट सिर्फ आंकड़ों और योजनाओं का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह…

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29 जनवरी : भारतीय पत्रकारिता की चेतना का दिवस

– Purnendu Pusshpesh हर वर्ष 29 जनवरी भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्मृति के रूप में उपस्थित होता है। सामान्य जन के लिए…

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हास्य-व्यंग्य : भगवान करे मेरे ख़ानदान में पप्पू पैदा न हो!

– पूर्णेन्दु पुष्पेश  भगवान करे मेरे ख़ानदान में पप्पू पैदा न हो! यह कोई व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं है, न ही किसी नवजात के भविष्य को कोसने…

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डिजिटल मीडिया एथिक्स 2021 : अनुशासन से ही बचेगी डिजिटल पत्रकारिता की साख

– पूर्णेन्दु पुष्पेश.  किसी भी समाज, संस्था या देश को सुचारु रूप से चलाने के लिए केवल आज़ादी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उस आज़ादी…

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वेब पत्रकारिता: निबंधित वेब पत्रकार और जनता का भरोसा

– पूर्णेन्दु पुष्पेश वेब न्यूज़ मीडिया आज सिर्फ़ सूचना का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह एक जीवंत डिजिटल आंदोलन बन चुका है। इस आंदोलन ने…

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आज की कांग्रेस को देश के सामने अपना वास्तविक एजेंडा स्पष्ट करना होगा

– पूर्णेन्दु पुष्पेश …. कांग्रेस कभी भारत की आज़ादी की लड़ाई का केंद्रीय स्तंभ रही थी। उस दौर में मतभेद थे, रणनीतिक गलतियाँ भी थीं,…

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हिंदू मरते रहें, और वे कहते रहें -सब ठीक है

पूर्णेन्दु पुष्पेश . बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ जो हो रहा है, उसे अब “अलग-थलग घटना” कहकर टालना खुद से झूठ बोलने जैसा है। यह…

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जड़ों से जुड़ती नई पीढ़ी ही भारत का भविष्य

– पूर्णेन्दु पुष्पेश  भारत आज जिस मोड़ पर खड़ा है, वहां सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि हमारे पास कितनी तकनीक है या हमारी…

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