सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ झारखंड जैसे राज्य के लिए यह विडंबना ही कही जाएगी कि जहां एक ओर ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों…
View More झारखंड के सरकारी अस्पतालों से क्यों कतराते हैं युवा डॉक्टर?Category: EDITORIAL
जनजातीय चेतना और राष्ट्रनिर्माण में नागरिक आचरण की भूमिका
सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ जब हम राष्ट्र और समाज की रक्षा की बात करते हैं, तो हमारी कल्पना अक्सर सीमाओं पर तैनात जवानों,…
View More जनजातीय चेतना और राष्ट्रनिर्माण में नागरिक आचरण की भूमिकाबोकारो में बढ़ता अपराध: पुलिस के लिए चुनौती भी, अवसर भी
सम्पादकीय : पूर्णेंदु सिन्हा ‘पुष्पेश’ बोकारो में इन दिनों अपराध की तस्वीर कुछ ऐसी बनती जा रही है, जो न केवल पुलिस की सक्रियता की…
View More बोकारो में बढ़ता अपराध: पुलिस के लिए चुनौती भी, अवसर भीबेरमो में कोयला माफिया का बोलबाला—जांच कमजोर या जानबूझकर आंख बंद?
Editorial by Purnendu Sinha ‘Pushpesh’ झारखंड के बेरमो क्षेत्र में कोयले के अवैध उत्खनन का सिलसिला एक बार फिर सुर्खियों में है। बीते कुछ महीनों…
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Editorial by : Purnendu Sinha ‘Pushpesh’ झारखंड, एक आदिवासी बहुल राज्य, अपने सांस्कृतिक वैभव और प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद आज देश में बच्चों की…
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सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश’ भारत में बाल श्रम को लेकर जितनी संवेदनशील बातें होती हैं, ज़मीनी सच्चाई उससे उतनी ही क्रूर है।…
View More बाल श्रम का ज़हर: आँकड़ों की चुप्पी, प्रशासन की मौनस्वीकार्यताबोकारो में संस्कृति की वापसी : एक उपायुक्त की साहित्यिक चेतना और कलाकारों की आशा
संपादकीय: — पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश’ बोकारो जिला लंबे समय से केवल उद्योग और उत्पादन का परिचय बनकर रह गया था। इस शहर की पहचान लौह…
View More बोकारो में संस्कृति की वापसी : एक उपायुक्त की साहित्यिक चेतना और कलाकारों की आशाजनप्रतिनिधित्व की साख पर सवाल: श्वेता सिंह प्रकरण और लोकतंत्र की परीक्षा
सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ उसकी पारदर्शी और जवाबदेह राजनीतिक व्यवस्था होती है। और जब वही व्यवस्था सवालों के…
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सम्पादकीय – पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ ‘ऑपरेशन ‘सिन्दूर ‘ के बाद हमें इस समय की बदलती रणनीति को गंभीरता से समझना चाहिए। भारत अब…
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सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ कभी देश को पहले रखने की बात करने वाले दल आज उस बात के अर्थ समझने में असहज महसूस…
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