भारत में वेब पत्रकारिता के बढ़ते प्रभाव और बदलते मीडिया परिदृश्य के बीच, “वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (WJAI)” एक सशक्त और संगठित मंच के…
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झारखंड के सरकारी अस्पतालों से क्यों कतराते हैं युवा डॉक्टर?
सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ झारखंड जैसे राज्य के लिए यह विडंबना ही कही जाएगी कि जहां एक ओर ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों…
View More झारखंड के सरकारी अस्पतालों से क्यों कतराते हैं युवा डॉक्टर?जनजातीय चेतना और राष्ट्रनिर्माण में नागरिक आचरण की भूमिका
सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ जब हम राष्ट्र और समाज की रक्षा की बात करते हैं, तो हमारी कल्पना अक्सर सीमाओं पर तैनात जवानों,…
View More जनजातीय चेतना और राष्ट्रनिर्माण में नागरिक आचरण की भूमिकाबोकारो में बढ़ता अपराध: पुलिस के लिए चुनौती भी, अवसर भी
सम्पादकीय : पूर्णेंदु सिन्हा ‘पुष्पेश’ बोकारो में इन दिनों अपराध की तस्वीर कुछ ऐसी बनती जा रही है, जो न केवल पुलिस की सक्रियता की…
View More बोकारो में बढ़ता अपराध: पुलिस के लिए चुनौती भी, अवसर भीचिन्मय विद्यालय सहित बोकारो के चार स्कूल सहोदया समूह से निष्कासित
कार्यकारिणी समिति के चुनाव में अमर्यादित गतिविधियों के मद्देनजर कोर कमेटी ने सर्वसम्मति से लिया निर्णय बोकारो। विद्यालयों को एक मंच पर जोड़कर शैक्षणिक उत्थान…
View More चिन्मय विद्यालय सहित बोकारो के चार स्कूल सहोदया समूह से निष्कासितझारखंड प्रशासनिक सेवा में बड़ा फेरबदल, 56 IAS अफसरों का तबादला-पदस्थापन
रांची: झारखंड सरकार ने बुधवार को 56 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों का बड़ा तबादला और पदस्थापन कर नौकरशाही में व्यापक बदलाव किया है। कार्मिक…
View More झारखंड प्रशासनिक सेवा में बड़ा फेरबदल, 56 IAS अफसरों का तबादला-पदस्थापनबेरमो में कोयला माफिया का बोलबाला—जांच कमजोर या जानबूझकर आंख बंद?
Editorial by Purnendu Sinha ‘Pushpesh’ झारखंड के बेरमो क्षेत्र में कोयले के अवैध उत्खनन का सिलसिला एक बार फिर सुर्खियों में है। बीते कुछ महीनों…
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Editorial by : Purnendu Sinha ‘Pushpesh’ झारखंड, एक आदिवासी बहुल राज्य, अपने सांस्कृतिक वैभव और प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद आज देश में बच्चों की…
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सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश’ भारत में बाल श्रम को लेकर जितनी संवेदनशील बातें होती हैं, ज़मीनी सच्चाई उससे उतनी ही क्रूर है।…
View More बाल श्रम का ज़हर: आँकड़ों की चुप्पी, प्रशासन की मौनस्वीकार्यतातीन दशक की चुप्पी : संस्कार और संवाद की खोज में बोकारो
सदियों पुरानी नीति रही है — किसी देश या प्रदेश को यदि कमज़ोर करना हो, तो सबसे पहले उसकी संस्कृति पर प्रहार करो। उसकी कला,…
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