भवसागर पार लगाने वाले ,
हे रघुनन्दन तुम्हें प्रणाम ।
राज्य त्यागि बन आने वाले ,
मुनिजन अभय बनाने वाले ,
केवट से चरन धुलाने वाले ,
हे रघुनन्दन तुम्हें प्रणाम ।
भवसागर पार लगाने वाले…….
दीनों पर दया दिखाने वाले ,
अधमों को गले लगाने वाले ,
जूठे बेरों को खाने वाले ,
हे रघुनन्दन तुम्हें प्रणाम ।
भवसागर पार लगाने वाले…….
सागर पर सेतु बँधाने वाले ,
दानव दल को दहलाने वाले ,
असुरन्ह निज धाम पठाने वाले ,
हे रघुनन्दन तुम्हें प्रणाम ।
भवसागर पार लगाने वाले…..
रचनाकार :

ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

