प्रस्तुत है शरणागत भजन के रूप में मेरी ये रचना :——-.
दर्शन देदो घनश्याम मुरारी । आयो प्रभु जी तेरे द्वार मुरारी ।। दर्शन देदो……………. शरण में तेरी मैं तो आया , चरणों में प्रभु शीश झुकाया , तुम हो दया के भण्डार मुरारी । दर्शन देदो……………. द्वार दया का जब तू खोले , अंधा देखे गूँगा बोले , पंगु करे है गिरि पार मुरारी । दर्शन देदो……………. मैं कपटी खल कामि प्रभू जी , कुटिल कुमारग गामि प्रभू जी , लाज हमारी तेरे हाथ मुरारी । दर्शन देदो……………. मैं सेवक तुम स्वामि प्रभू जी , अपनी बिरद सम्हारो प्रभू जी , कर दो हमारी बेड़ा पार मुरारी । दर्शन देदो…………….