आज होली के अवसर पर भक्ति रस से हट कर प्रेम रस की ओर आप सभी को ले चल रहा हूँ। एक युवती का पती परदेश से घर आ रहा है और वह उसकी प्रतीक्षा में किस प्रकार उसके आगमन की तैयारी कर रही है यही भोजपुरी में लिखी गई इस रचना में दर्शाया गया है :—–
घर अइलन हो बलमुआँ खेलब होरी ।
जब रे बलमुआँ टिशनियाँ पर आयो ,
रचि रचि अँगना बहारे गोरी ।
घर अइलन हो बलमुआँ खेलब होरी ।
घर अइलन हो बलमुआँ………..
जब रे बलमुआँ दुअरवा पर आयो ,
रचि रचि केशिया सँवारे गोरी ।
घर अइलन हो बलमुआँ खेलब होरी ।
घर अइलन हो बलमुआँ………..
जब रे बलमुआँ सेजरिया पर आयो ,
अंग अंग रंग लगावै गोरी ।
घर अइलन हो बलमुआँ खेलब होरी ।
घर अइलन हो बलमुआँ………..
रचनाकार :

ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

