स्वागत है ऋतुराज——
तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज ।
ओढ़ चुनरिया पीली सरसों,
नाच रही है आज ।
अम्बुआ ऊपर छाये मंजरी,
सजी है मधुमय साज ।।
तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज ।
कोयल करे पुकार,
भँवर की गुंजन गूँजे ।
हे प्रिय आओ! इस बसन्त में,
तुम बिन कछु नहिं सूझे ।।
मधुर पवन भी तुम्हें बुलाता,
तुम बिन सब कुछ सूना आज ।
आओ प्रिये! सब तुम्हें बुलाते,
करो प्रकृति का स्वागत आज ।।
तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज ।
रचनाकार :

ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

