ऋतु बसन्त——
देखो ऋतु बसन्त आया है,
कैसा मधुमय साज सजाए ।
सरसों ओढ़ी पीलि चुनरिया,
लहर लहर लहराए ।
कोयल गावै राग बसन्ती,
भँवरों की गुंजन मन भाए ।
कुसुमित हर डाली डाली,
पक्षी कलरव गान सुनाए ।
अम्बुआ चादर ओढ़ मंजरी,
मधुर मधुर मुस्काए ।
पछुआ पवन झकोरे मारे,
फगुनाहट की अगम जनाए ।
देखो ऋतु बसन्त आया है,
कैसा मधुमय साज सजाए ।
रचनाकार :

ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

