DHARM भजले नाम उदार…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र admin March 23, 2025 भजले नाम उदार — दुर्लभ पावन नर तन पाया, जनम अकारथ यूँहिं गंवाया। अन्त समय जब आया बन्दे, सिर धुनि धुनि पछताया। जो भी कछु पल बचा है प्यारे, जीवन लेहु सुधार । छोड़ि कपट चतुराई रे बन्दे, भजले नाम उदार। रचनाकार : ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र