कन्हैया तेरी मुरली शौतन भई….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

राधा और कृष्ण का प्रेम मन और वाणी से परे है। इसका कोई वर्णन नहीं कर सकता। जिस मुरली की तान सुनकर राधा सुधबुध खो कर नाचने लगती थी उसी मुरली को कहती है कि हे कन्हैया तुम्हारी मुरली तो मेरी शौतन हो गई है। यह राधा का अलौकिक प्रेम ही तो है। इसी प्रसंग पर प्रस्तुत है मेरी ये रचना:——-

कन्हैया तेरी मुरली शौतन भई ।
सात सुर सात राग,
हिय में जरावै आग,
जनम कि बैरन भई ।
कन्हैया तेरी मुरली………..
जब जब तु मोहन मुरलिया बजावत,
बैरन मुरलिया मोहे तड़़पावत,
निन्दिया मोर नैनन गई ।
कन्हैया तेरी मुरली………..
अधरन्ह पर धारत हो निश दिन मुरलिया,
राधा को भूल गए बाँके सँवरिया,
राधा पराई भई ।
कन्हैया तेरी मुरली………..

रचनाकार :

ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र