पार्वती जी की माता मैना जी ने जब दुल्हा शिव जी के भयंकर रूप को देखा तो डर कर बिलाप करने लगीं कि ऐसे बावले बर से मैं पार्वती का विवाह नहीं करूँगी चाहे बेटी कुँआरी रह जाय। कहती हैं कि मैं जहर खा लूँगी, समुद्र में कूद जाऊँगी पर ऐसे बावले बर से पार्वती का विवाह नहीं करूँगी। इसी प्रसंग पर प्रस्तुत है मेरी भोजपुरी में ये रचना :—–
आगे माई एही बउराह बर,
गौरा ना बियहबो,
बलु गौरा रहिहैं कुआँर ।
जहर खैबो माहुर खैबो ,
कुदि जैबो जलधी अपार ।
आगे माई एही बउराह बर……….
रूप भयानक देखि डर लागै ,
सँपवा छोड़ेला फुफकार ।
आगे माई एही बउराह बर……….
माई ना बाप ना भाइ भौजाई ,
जेहिके ना घर ना दुआर ।
आगे माई एही बउराह बर………..
नारद मुनि के काइ हम बिगड़नी ,
बरवा खोजलें बउराह ।
आगे माई एही बउराह बर……….
रचनाकार :
ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र