सड़क सुरक्षा अभियान की खुली पोल: एक बाइक पर सवार तीन पुलिसकर्मी

  • संजय गोराईं

सरायकेला: :एक ओर जिला परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा अभियान के तहत आम जनता को नियमों के प्रति जागरूक करने और दुर्घटनाओं पर नियंत्रण की बातें कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सरायकेला–कांड्रा मुख्य मार्ग पर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ती नज़र आ रही हैं।

हाल ही में सरायकेला–कांड्रा मार्ग पर तीन पुलिसकर्मी एक ही बाइक पर सवार होकर चलते देखे गए। न किसी के सिर पर हेलमेट था और न ही सड़क सुरक्षा नियमों का कोई पालन। यह दृश्य प्रशासन की कथनी और करनी के बीच के अंतर को साफ उजागर करता है।

सवाल यह है कि यदि इसी तरह कोई आम नागरिक तीन सवारी या बिना हेलमेट बाइक चलाते पकड़ा जाता, तो उस पर भारी जुर्माना, चालान और सख्त कार्रवाई तय होती। लेकिन जब नियम तोड़ने वाले खुद कानून के रक्षक हों, तो कार्रवाई कौन करेगा?

गौरतलब है कि 3 फरवरी से 17 फरवरी तक मैट्रिक और इंटर की परीक्षाएं चल रही हैं, साथ ही चुनाव चिन्ह आवंटन को लेकर भी जिले में जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती की गई है। ऐसे संवेदनशील समय में पुलिस कर्मियों का इस तरह नियम तोड़ना न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि आम जनता को गलत संदेश भी देता है।

सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन यदि आम लोगों के लिए अनिवार्य है, तो फिर प्रशासनिक और पुलिस कर्मियों पर यह नियम क्यों लागू नहीं होते? क्या कानून सिर्फ जनता के लिए है?

यह घटना जिला प्रशासन की लापरवाह और विफल कार्यशैली को दर्शाती है, जहाँ नियम बनाने वाले ही नियम तोड़ते नज़र आ रहे हैं। जब तक प्रशासन खुद उदाहरण पेश नहीं करेगा, तब तक सड़क सुरक्षा अभियान महज़ कागज़ी और दिखावटी साबित होते रहेंगे।

अब ज़रूरत है कि इस मामले का जवाबदेही तय हो और दोषी पुलिस कर्मियों पर वही कार्रवाई हो, जो आम जनता पर की जाती है—ताकि कानून का डर सिर्फ भाषणों तक सीमित न रह जाए।

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