DHARM प्रभु बिनु नहिं कोउ शरणागत हितकारी…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र admin February 7, 2025 प्रस्तुत है शरणागत भजन के रूप में मेरी ये रचना :——. प्रभु बिनु नहिं कोउ शरणागत हितकारी । आरत बचन सुनी द्रौपति की , राखी लाज मुरारी । शरणागत हितकारी । प्रभु बिनु नहिं कोउ………… आरत हो गजराज पुकारा , गज को आके उबारी । शरणागत हितकारी । प्रभु बिनु नहिं कोउ………… आए शरण विभीषण प्रभु की , राखी शरण खरारी । शरणागत हितकारी । प्रभु बिनु नहिं कोउ………… रचनाकार : ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र