तैयारी चुनाव की – बारह………- डॉ प्रशान्त करण

रघुवंशी जी सुबह रुआँसे थे . खबरीलाल ने पूछ लिया – सर कोई मुसीबत आ गयी क्या ? बोले – धनतेरस गया , दिवाली भी…

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बनना नए कीर्तिमान का ……- डॉ प्रशान्त करण

नए कीर्तिमान बना देना बहुत कठिन कार्य है। यह वर्षों के कठिन परिश्रम से होता है। और नए कीर्तिमान को स्वयं ही काटकर और नया…

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आव आव हो चन्दा हमार अँगना ……- ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

बाल मन को आनन्द देने वाली मेरी ये रचना प्रस्तुत है । बालक कृष्ण चन्द्रमा को देख कर मचल उठे । कहते हैं “मैया मोरि…

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बिगड़ती डेमोग्राफी में हिंदू और आदिवासी अस्तित्व पर संकट

सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश’।   भारत का समाज प्राचीनकाल से ही धार्मिक सहिष्णुता और विविधता का प्रतीक रहा है। हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, आदिवासी और…

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विरंचि नारायण और अमर बाउरी : चुनौती स्वीकार करने का समय

-पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ वैसे तो बोकारो विधानसभा में भाजपा उम्मीदवार बिरंचि नारायण की जीत लगभग तय मानी जा रही है फिर भी कांग्रेस उम्मीदवार…

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उचरेला कागा अंँगनवाँ हो……- ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रभु श्री राम के आने की प्रतीक्षा माता शबरी कैसे कर रही है, मेरी भोजपुरी में लिखी गई इस रचना के माध्यम से प्रस्तुत है…

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उन चरनन का गुणगान करूँ,……- ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

. चरण कमल रसपान करूँ . उन चरनन का गुणगान करूँ, जेहि चरनन मुनि तिय तारत है । उन चरनन का रज पान करूँ, जेहि…

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हेमंत सोरेन की चुप्पी: आदिवासी संस्कृति की हत्या या राजनीतिक विवशता?

सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश’।   चुनावी बयानबाजी सही, अभद्र टिप्पणी कर आप थोड़े दिन के लिए लाइमलाइट में तो रह सकते हैं, जनता का विश्वास…

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सुनियो जि नाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारि……- ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रस्तुत है शरणागत भजन के रूप में मेरी ये रचना:—- सुनियो जि नाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारि , नाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारी…

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मोरी बालि रे उमीरिया……- ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रस्तुत है भोजपुरी में मेरी ये रचना जिसमें राधा जी का विरह वर्णन किया गया है :—— मोरी बालि रे उमीरिया , अब कैसे बीति…

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