सम्पादकीय : पूर्णेन्दु पुष्पेश। अगर आप भारतीय मीडिया में दलित संपादकों की संख्या जानने का प्रयास कर रहे हैं, तो बधाई हो! आप उस जटिल…
View More भारतीय मीडिया में दलित संपादक: जातिवाद की नई व्याख्या या बौद्धिक पतन?Author: admin
भजले सीतापति रघुराई….. – ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रस्तुत है मेरी रचना – प्रभु श्रीराम का भजन :— भजले सीतापति रघुराई । जाके भजत भोले शिव शंकर , चरन कमल चित लाई ।…
View More भजले सीतापति रघुराई….. – ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रचास में अवैध लॉटरी कारोबार का बोलबाला, पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल
काशी, सुबोध व राजू का नेटवर्क फैला है पूरे चास में। स्थानीय लोगों का आरोप, पुलिस प्रशासन की है मिलीभगत। बोकारो: चास थाना क्षेत्र में…
View More चास में अवैध लॉटरी कारोबार का बोलबाला, पुलिस प्रशासन पर उठे सवालझारखंड में वंशवाद का नया अध्याय, समर्पित कार्यकर्ताओं का क्या होगा ?
सम्पादकीय : पूर्णेन्दु पुष्पेश। झारखंड में इस बार विधानसभा चुनाव का नया रंग जमने वाला है, और इसकी वजह भी खास है। चुनावी मैदान में…
View More झारखंड में वंशवाद का नया अध्याय, समर्पित कार्यकर्ताओं का क्या होगा ?माझी जो नाव डुबोए उसे कौन पार लगाए
सम्पादकीय : पूर्णेन्दु पुष्पेश। जम्मू-कश्मीर में चुनाव की घोषणा के साथ राहुल गांधी ने एक और नई गारंटी दी है – “इंडी गठबंधन की अगली…
View More माझी जो नाव डुबोए उसे कौन पार लगाएरघुबर नामहिं एक आधार….. – ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रभु का नाम हीं भवसागर पार उतरने के लिए एक आधार है। गणिका, गिद्ध अजामिल आदि अनेक पापी प्रभु को भज कर भवसागर पार उतर…
View More रघुबर नामहिं एक आधार….. – ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रकर्म बंधन…….— डॉ प्रशान्त करण
तीन महीने उस प्रदेश के सरकारी सभी कार्यालयों में खूब गहमा-गहमी रही। हर कोई इधर-उधर दौड़ता फिरने लगा। कार्यालय में सारे काम ठप्प। कोई कब…
View More कर्म बंधन…….— डॉ प्रशान्त करणकांग्रेस के भविष्य पर संकट: राहुल और प्रियंका की अनुभवहीनता का असर
सम्पादकीय : पूर्णेन्दु पुष्पेश। भारतीय राजनीति में कांग्रेस पार्टी की मौजूदा स्थिति किसी से छिपी नहीं है। कभी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी हुआ…
View More कांग्रेस के भविष्य पर संकट: राहुल और प्रियंका की अनुभवहीनता का असरओ हरि जी! चरन कमल बलिहारी….. – ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रस्तुत है प्रभु श्रीराम जी के चरणकमल की वन्दना मेरी कलम से:– ओ हरि जी! चरन कमल बलिहारी । ओ हरि जी………… जेहि चरनन से…
View More ओ हरि जी! चरन कमल बलिहारी….. – ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रसंविधान और राज्य सरकारों का नया खेल: अधिकारों का बंटवारा या सर्कस?
सम्पादकीय : पूर्णेन्दु पुष्पेश। क्या आप जानते हैं कि भारत के संविधान के साथ अब एक नया खेल खेला जा रहा है? जी हाँ, यह…
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