भजन बिन बाणी ना शोभे भैया…………….. ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

जिस मुख से भजन न हो उस मुख से निकली हुई वाणी शोभा नहीं पाती। जिन आँखों से प्रभु का दर्शन न हो अथवा दर्शन…

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राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा एक बड़ी चुनौती

– विजय कुमार झा, वरिष्ठ पत्रकार।    देश के भीतर आज जो कुछ भी हो रहा है, उससे भारत की संप्रभुता खतरे में नजर आ…

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बनवाँ में जनमे ललनवाँ………..ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रस्तुत है लव कुश प्रसंग पर मेरी ये रचना :—– बनवाँ में जनमे ललनवाँ , मगन भयो सिया जी के मनवाँ । बालमीकि मुनि सगुन…

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करम गति टारे नाहिं टरे………ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

कर्म की गति टाले नहीं टल सकती। प्रभु बिरले किसी को मनुष्य शरीर देते हैं पर इस संसार में आकर मनुष्य प्रभु को भूल कर…

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तुम बिन हमरी कौन खबर ले…….ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रस्तुत है शरणागत भजन के रूप में मेरी ये रचना :—– तुम बिन हमरी कौन खबर ले , माधव मदन मुरारी जी । तुम शरणागत…

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राखो अपनी शरन में रघुबंश मनी……..ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रस्तुत है शरणागत भजन के रूप में मेरी ये रचना :— राखो अपनी शरन में रघुबंश मनी । मैं तो कपटी कुटिल खल लोभी प्रभू…

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निजी क्लिनिकों में डॉक्टरों की गतिविधियों पर बोकारो उपायुक्त की कड़ी निगरानी

एक चिकित्सक अधिकतम दो क्लीनिकों में कर सकते हैं प्रैक्टिस, सुनिश्चित करें टीमः उपायुक्त नियमित अल्ट्रासाउण्ड क्लीनिकों का करें औचक निरीक्षण, फार्म – एफ की…

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रे मनुवाँ हरि चरनन के लोभी …….ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

मन को भँवरा और प्रभु के चरण को कमल से उपमा दी गई है । जिस प्रकार भँवरा कमल पर लुभाए रहता है उसी प्रकार…

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जपत मन आनन्द हरि हरि…….ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रभु का नाम जपने से मन में जो आनन्द की अनुभूति होती है उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। प्रस्तुत है मेरी ये रचना जिसमें…

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चम्पाई सोरेन झारखंड में नई पार्टी बना लें तो तीनों के लिए अच्छा !

सम्पादकीय : पूर्णेन्दु पुष्पेश।   झारखंड की राजनीति में वर्तमान में जो कुछ भी हो रहा है, वह राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से समझने…

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