जब हम भारत की स्वतंत्रता की गाथा को पढ़ते हैं, तो हमारे सामने दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, और लाहौर जैसे बड़े शहरों की तस्वीरें उभरती हैं।…
View More भारत की आज़ादी में झारखंड क्षेत्र का योगदान : क्रांति की धरती से स्वाधीनता की राह तकCategory: National
वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया- डिजिटल पत्रकारों के अधिकार और गरिमा की एक सशक्त आवाज़
भारत में वेब पत्रकारिता के बढ़ते प्रभाव और बदलते मीडिया परिदृश्य के बीच, “वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (WJAI)” एक सशक्त और संगठित मंच के…
View More वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया- डिजिटल पत्रकारों के अधिकार और गरिमा की एक सशक्त आवाज़बोकारो में बढ़ता अपराध: पुलिस के लिए चुनौती भी, अवसर भी
सम्पादकीय : पूर्णेंदु सिन्हा ‘पुष्पेश’ बोकारो में इन दिनों अपराध की तस्वीर कुछ ऐसी बनती जा रही है, जो न केवल पुलिस की सक्रियता की…
View More बोकारो में बढ़ता अपराध: पुलिस के लिए चुनौती भी, अवसर भीचिन्मय विद्यालय सहित बोकारो के चार स्कूल सहोदया समूह से निष्कासित
कार्यकारिणी समिति के चुनाव में अमर्यादित गतिविधियों के मद्देनजर कोर कमेटी ने सर्वसम्मति से लिया निर्णय बोकारो। विद्यालयों को एक मंच पर जोड़कर शैक्षणिक उत्थान…
View More चिन्मय विद्यालय सहित बोकारो के चार स्कूल सहोदया समूह से निष्कासितजनप्रतिनिधित्व की साख पर सवाल: श्वेता सिंह प्रकरण और लोकतंत्र की परीक्षा
सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ उसकी पारदर्शी और जवाबदेह राजनीतिक व्यवस्था होती है। और जब वही व्यवस्था सवालों के…
View More जनप्रतिनिधित्व की साख पर सवाल: श्वेता सिंह प्रकरण और लोकतंत्र की परीक्षाभ्रष्टाचार की हाँडी और नौकरशाही का काला चावल
सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ झारखंड की धरती एक बार फिर उसी दाग़ से सनी है, जो बरसों से इसकी छवि को मलिन करता रहा…
View More भ्रष्टाचार की हाँडी और नौकरशाही का काला चावलबोकारो की जनता को बहकाना नहीं, सच्चाई बताना जरूरी है
सम्पादकीय: पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ लोकतंत्र की बुनियाद उस भरोसे पर टिकी होती है जो जनता अपने प्रतिनिधियों पर करती है। जब यह भरोसा टूटता…
View More बोकारो की जनता को बहकाना नहीं, सच्चाई बताना जरूरी हैदेशहित से पृथक विपक्ष: एक सुनियोजित आत्मविनाश
सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ अजीब दौर है देश का — एक तरफ भारत दुनिया को अपनी सैन्य क्षमता और कूटनीतिक समझ से अचंभित…
View More देशहित से पृथक विपक्ष: एक सुनियोजित आत्मविनाशथोड़ा “ज़िंदगी जीने की क्लास” भी ज़रूरी है
सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ चलिए, सीधी बात करते हैं — हम सबने स्कूल और कॉलेज में खूब पढ़ाई की है। गणित में पसीना…
View More थोड़ा “ज़िंदगी जीने की क्लास” भी ज़रूरी हैपाकिस्तान, अब तो अपनी ब्लैक मनी को काम में ले ही लो!
-पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ एक ख्याल आया और मुस्कान छूट गई। फिर सोचा — हँसी में टाल देने जैसी भी नहीं है यह बात।…
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