माता कौशल्या बालक राम को पालने में झुला रही हैं। इसी प्रसंग पर प्रस्तुत है मेरी ये रचना :—–
प्यारे ललना को मैया झुलावै पलना ।
प्यारे राघव को मैया झुलावै पलना ।।
प्यारे ललना को मैया…………
सोने पलन लागी रेशम डोरी ,
हीरा जड़ल दमकत चहूँ ओरी ,
तेहि पर मैया लिटावै ललना ।
हो झुलावै पलना ।
प्यारे ललना को मैया…………
धीरे धीरे मैया झुलावै पलनवाँ ,
चन्दा को मैया बुलावै अँगनवाँ ,
गा गा के मैया खेलावै ललना ।
हो झुलावै पलना ।
प्यारे ललना को मैया…………
मैया के सुख बरनी न जाई ,
बरनत सुख शारद सकुचाई ,
छायो आनन्द भवन अँगना ।
हो झुलावै पलना ।
प्यारे ललना को मैया…………
रचनाकार :

ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

