प्रस्तुत है मेरी ये रचना सरस्वति वन्दना :——-.
हे मैया शारदे अरज मोर सुन लो ,
भक्तन का करदो कल्यान ।
हे जननी भक्तन का करदो कल्यान ।
गावत हैं गुनवां तोहार हे माता ,
मद मोह त्यागि अभिमान ।
हे जननी भक्तन का करदो……….
तुम्हीं जग त्राता, बुद्धि विधाता ,
तुम्हीं हो विद्या के दाता हे माता ,
हर लो हमार अज्ञान ।
हे जननी भक्तन का करदो……….
तुम्हीं हो नैया तुम्हीं खेवैया ,
तुम्हीं तो हो पतवार हे माता ,
करदो हमारी बेड़ा पार ।
हे जननी भक्तन का करदो……….
तोहरे शरनियाँ में आयो हे माता ,
चरनन में शीश झुकायो हे माता ,
तुम हो दया के निधान ।
हे जननी भक्तन का करदो………..
रचनाकार :

ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

