प्रस्तुत है मेरी ये रचना शरणागत भजन के रूप में :——.
रे मन! अब कहीं न जा ।
राम चरण को छोड़ बावरे,
कहीं शरण नहिं पा ।
अब कहीं न जा ।
रे मन! अब कहीं………
राम चरण अति पावन जग में,
सुन्दर सुखद सुहावन जग में,
ता में नेह लगा ।
अब कहीं न जा ।
रे मन! अब कहीं………
कितने पापी दुष्ट को तारे,
कितने अधम नीच उद्धारे,
कइ गए मोक्ष सिधा ।
अब कहीं न जा ।
रे मन! अब कहीं………
प्रभु बिन तेरा कौन सहारा,
क्यों फिरता है मारा मारा,
प्रभु में चित्त लगा ।
अब कहीं न जा ।
रे मन! अब कहीं………
रचनाकार :

ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

