शिक्षक जागेगा, तभी पीढ़ी संस्कारित होगी

– पूर्णेन्दु पुष्पेश बीते दिनों देश में जेन-जी यानी नई पीढ़ी के आंदोलन और उनके कई रूप देखने को मिले। कहीं युवाओं का गुस्सा लोकतांत्रिक…

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स्वतंत्रता और स्वच्छंदता

सम्पादकीय : पूर्णेन्दु पुष्पेश स्वतंत्रता मनुष्य और समाज की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है, लेकिन स्वतंत्रता का अर्थ स्वच्छंदता नहीं है। दोनों शब्द…

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खजाना सिकुड़ा, विकास की रफ्तार पर सवाल

– Purnendu Pusshpesh   झारखंड सरकार की वित्तीय तस्वीर इस समय ऐसी है, जिसे केवल “पैसा कम मिला” कहकर टाला नहीं जा सकता। चालू वित्तीय वर्ष…

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