तिरुलडीह में अवैध बालू का खेल, 300 सीएफटी के चालान पर 700 सीएफटी ढुलाई का आरोप

सरायकेला-खरसावां : जिले के तिरुलडीह क्षेत्र में कथित अवैध बालू भंडारण और परिवहन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में कई स्थानों पर अवैध रूप से बालू का डंप तैयार कर रात-दिन हाईवा के जरिए बालू का परिवहन किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार बालू की खेप पश्चिम बंगाल, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भेजी जा रही है।

300 सीएफटी का चालान, 700 सीएफटी लोड होने का आरोप

ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों ने बालू परिवहन में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कई हाईवा में महज 300 सीएफटी बालू का वैध चालान रहता है, जबकि वाहन में करीब 700 सीएफटी बालू लोड किया जाता है। आरोप सही होने की स्थिति में करीब 400 सीएफटी बालू बिना वैध चालान के परिवहन किए जाने का मामला सामने आ सकता है।

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि दिन में 300 सीएफटी बालू का एक चालान बनवाया जाता है और उसी चालान के आधार पर रात के समय दो से तीन ट्रिप तक बालू का परिवहन किया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रशासनिक मिलीभगत का भी आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि तिरुलडीह क्षेत्र में लंबे समय से अवैध बालू कारोबार का नेटवर्क सक्रिय है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर प्रभावी निगरानी और कार्रवाई नहीं होने से कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं। कुछ ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। हालांकि इस संबंध में किसी अधिकारी या विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ग्रामीणों के अनुसार समय-समय पर अवैध बालू के डंप जब्त किए जाने की कार्रवाई तो होती है, लेकिन परिवहन में लगे वाहनों और पूरे नेटवर्क के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाती। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

नदी और सरकारी राजस्व को नुकसान की आशंका

स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी घाटों से लगातार बालू उठाव होने से नदियों के प्राकृतिक स्वरूप पर असर पड़ रहा है। इससे जलस्रोतों और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। वहीं यदि कम मात्रा का चालान जारी कर अधिक मात्रा में बालू का परिवहन किया जा रहा है तो इससे सरकारी राजस्व को भी नुकसान हो सकता है।

डंप, हाईवा और चालान की जांच की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से तिरुलडीह क्षेत्र में संचालित कथित बालू डंप, हाईवा और परिवहन चालानों की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वाहनों में वास्तविक रूप से कितनी मात्रा में बालू लदा था और उसके लिए कितनी मात्रा का चालान जारी किया गया, इसकी जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।

ग्रामीणों ने अवैध कारोबार में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने की भी मांग की है। अब निगाहें जिला प्रशासन और खनन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं कि इन गंभीर आरोपों की जांच कब शुरू होती है और तिरुलडीह में कथित अवैध बालू कारोबार पर किस तरह अंकुश लगाया जाता है।