शोभा बरनी न जाई रघुबीर सखी ….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रभु श्री राम राजसिंहासन पर विराजमान हैं। सखियाँ उनकी शोभा का वर्णन कर रही हैं। इसी प्रसंग पर प्रस्तुत है मेरी ये रचना :——- शोभा…

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आज अवध में बधावन बाजै……-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

राजा दशरथ ने जब श्रीराम जी का राज्याभिषेक करने का निश्चय किया तब अवध में उत्सव की तैयारियाँ होने लगीं। घर घर मंगल साज सजाए…

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रघुनाथ मड़वा में आए…….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

श्रीराम जानकी विवाह के शुभ अवसर पर प्रस्तुत है मेरी ये रचना :—— रघुनाथ मड़वा में आए । सखी सब देखन धाए । रघुनाथ मड़वा…

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ऐसो हैं कृपालु रघुराई……..-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रभु श्रीराम ऐसे कृपालु हैं कि अधम, नीच, पापियों को भी अपना परमधाम दे देते हैं। इसी प्रसंग पर प्रस्तुत है मेरी ये रचना:—– ऐसो…

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भजन करो राम का रे मन दिवाना….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रभु श्रीराम का भजन अपार संसार सागर से पार उतारने वाला है अतः रे मन तू प्रभु का भजन कर। प्रस्तुत है मेरी रचना राम…

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जिनके नाम भवसागर सेतू….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

जिस प्रभु के नाम स्मर्ण मात्र से कितने पापी भवसागर पार उतर गए, जिनका नाम हीं सेतु है वही प्रभु केवँट से पार उतारने के…

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मैं तेरा पुकारूँ नाम हे स्वामी….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रस्तुत है शरणागत भजन के रूप में मेरी ये रचना :—— मैं तेरा पुकारूँ नाम हे स्वामी , कब आओगे राम । काम क्रोध मद…

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बोलो राम राम राम…..-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

राम और श्याम दोनों एक दूसरे के पर्याय हैं। दोनों नाम पावन हैं। राम राम बोलिये या श्याम श्याम बोलिये दोनों भवसागर पार उतार देने…

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राम अवध में पधारे आज…..-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रभु श्री राम के बनवास से लौटने पर अयोध्या में अपरिमित आनन्द छाया हुआ है। इसी प्रसंग पर प्रस्तुत है मेरी ये रचना :- राम…

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राम हमारे कभी न रूठें ……-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

सारी दुनिया रूठ जाय , इसकी चिन्ता नहीं है मुझको । बस राम हमारे कभी न रूठें , यही हमारी विनती उनसे । सारी दुनिया…

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