परब्रह्म धरी पावन नर देही . (सवैया – प्रथम) दशरथ कौशल्या के प्रेम के वश, परब्रह्म धरी पावन नर देही । बहु बाल चरित्र करी…
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भजहु राम चरनन मोरे भाई….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
कागभुषुण्डी जी गरूड़ जी से ज्ञान और भक्ति का निरूपण करते हुए कहते हैं कि हे गरूड़ जी बिना भजन के श्रीराम जी रीझते नहीं…
View More भजहु राम चरनन मोरे भाई….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रश्रीमन् नारायण नारायण हरी हरी……….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रभु श्रीराम ने जब रावण का वध कर दिया तब सब देवता मुनि आए और प्रभु की स्तुति करने लगे। प्रभु के प्रति कृतज्ञता प्रकट…
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कागभुषुण्डी जी गरूड़ जी से भक्ति के विषय में वर्णन करते हुए कहते हैं कि हे गरूड़ जी भक्ति के बिना मनुष्य का शरीर शव…
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प्रभु श्रीराम वन में चले गए हैं। माता कौशल्या विरह में ब्याकुल हो कर बिलाप कर रही हैं। माता कौशल्या की विरह वेदना पर प्रस्तुत…
View More राम बिन गोदिया सूनी री सखिया….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रप्रगट भए रघुरैया….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रभु श्रीराम का प्राकट्य हुआ है, अयोध्या में उत्सव मनाया जा रहा है। तीनों माताएँ बालक राम की बार बार बलैया ले रहीं हैं। राजा…
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प्रभु के चरण में जिनकी लगन लग गई वो भवसागर पार उतर गया । इसी प्रसंग पर प्रस्तुत है मेरी ये रचना :——- साँवरे की…
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प्रस्तुत है शरणागत भजन के रूप में मेरी ये रचना :——- प्रभु बिनु नहिं कोउ, शरणागत हितकारी । आरत बचन सुनी द्रौपति की , राखी…
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प्रभु श्रीराम वन से अयोध्या लौट आए हैं। अवधवासियों के आनन्द की सीमा नहीं है। कहते हैं कि हे भैया चौदह वर्ष हम सभी विरह…
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प्रभु श्रीराम जब विवाह मण्डप में पधारे तो सखियाँ आरती कर उनका परिछन करने लगीं, विवाह के अवसर पर गाये जाने वाली मंगल गाली गाने…
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