झारखंड भाजपा: आत्ममुग्धता से बाहर आकर पुनरोदय की आवश्यकता

– Purnendu Sinha Pushpesh झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हालिया प्रदर्शन पर आत्ममंथन करते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि झारखण्ड में…

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समस्त चराचर जगत ही राममय है…….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

समस्त चराचर जगत ही राममय है- मैने समस्त चराचर जगत को राममय देखा । मैने पवित्र कामधेनु में राम को देखा , मैने गंदी नाली…

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मुक्तध्वनि : खबर बेचते, ईमानदारी छुपाते ‘लिफाफाखोर पत्रकार’

Purnendu Sinha ‘Pushpesh’ पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। यह वह पवित्र भूमि है, जहां सच्चाई की मशाल लेकर जनता की आवाज़…

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भाजपा की राजनीति: जानत है सो कहत नहिं कहत सो जानत नाहिं

Purnendu Sinha ‘Pushpesh’ “भईया बात भाजप की कहन सुनन को नाहिं। जानत है सो कहत नहिं कहत सो जानत नाहिं।” यह उक्ति भारतीय जनता पार्टी…

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रँगाली मैने चुनरी साँवरिया तोरे रंग में…….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रभु के रंग में जो रंग गया वो भवसागर पार उतर गया।। इसी प्रसंग पर प्रस्तुत है मेरी ये रचना :—– रँगाली मैने चुनरी साँवरिया…

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आजा मोरे राम जी चरनियाँ पखारौं…….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रभु श्रीराम गंगा पार उतरना चाह रहे हैं पर केंवट नाव नहीं ला रहा है, कहता है कि हे प्रभु जब तक चरण नहीं धुलाइएगा…

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हेमंत सरकार की नई पाली : लोकतंत्र, शिक्षा, रोजगर और विकास पर नई दृष्टि की आवश्यकता

-पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘     हाल ही में संपन्न हुए झारखंड विधानसभा चुनावों में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में इंडि गठबंधन (आईएनडीआईए) की जीत ने…

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कन्हैया तेरी मुरली शौतन भई…….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

राधा कहती हैं कि हे कन्हैया तुम्हारी मुरली तो मेरी शौतन हो गई है। दिन रात तुम इसे अपने अधरों पर धारण किए हुए रहते…

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शरणागतम् त्वम् पाहिमाम्…….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

मैनें इस रचना को तब लिखा था जब सारा विश्व कोरोना वायरस के संकट से त्रस्त था। मैने अपनी इस रचना के माध्यम से माँ…

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काहें गैल भैया हो अवधवा के छोड़ि के…….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रभु श्रीराम वन में चले गए हैं। भरत जी भाई विरह में व्याकुल होकर विलाप कर रहे हैं। प्रस्तुत है इसी प्रसंग पर भोजपुरी में…

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