प्रस्तुत है मेरी ये रचना होली गीत :—–
मत डारो रंग रघुबीरा ।
मोरी भीगत चुनरिया चीरा रे ।
मत डारो रंग……………
घर से निकली अवध गुजरिया ,
भरि भरि झोरी अबीरा रे ।
मत डारो रंग……………
भरि भरि मारत रंग पिचकारी ,
रंग गए रघुबीरा रे ।
मत डारो रंग……………
झूमत अवध नगर नर नारी ,
बाजत ढोल मजीरा रे ।
मत डारो रंग……………
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रचनाकार :

ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

