होली की अनन्त शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत है मेरी रचना “प्रकृति की होली” :——
******प्रकृति की होली*******
शुक पिक कोकिल बोलत बोली ।
जिमि बसन्त संग खेलत होली ।।
प्रकृती पुरुष भए मदमस्त ।
जिमि रति काम भए सब ग्रस्त ।।
बेलि बृक्ष गलबहियाँ मेलत ।
जिमि प्रिय प्रियतम होली खेलत ।।
त्रिविध बयार पत्र तृण डोलत ।
धीर पुरुष मन मधु रस घोलत ।।
पुष्प बाण ले काम पधारा ।
रतिमय भए जगत सब सारा ।।
रचनाकार :

ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

