प्रभु मोरे तुम बिन कौन उबारे…….ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रस्तुत है शरणागत भजन के रूप में मेरी ये रचना:—

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प्रभु मोरे तुम बिन कौन उबारे ।
बीच भवँर में नाव पड़ी है,
डूबि रह्यो मझधारे ।
बाँह पकड़ कर मोहे उबार प्रभु,
आयो शरन तुम्हारे ।
प्रभु मोरे तुम बिन………..
अगम अगाध कठिन भवसागर,
को अब पार उतारे ।
एक भरोसा तुम्हरेहिं स्वामी,
तुम हीं खेवनहारे ।
प्रभु मोरे तुम बिन………..
ममता मोह में पड़ा प्रभू जी,
बंधन पड़े हजारे ।
तुम्हरे माया के बश होकर,
भटकत हौं अँधियारे ।
प्रभु मोरे तुम बिन………..

 

रचनाकार

 


   ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र