मोरे नैन बावरे तरसत हरि दर्शन को…….ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

प्रस्तुत है मेरी ये रचना शरणागत भजन के रूप में :–

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मोरे नैन बावरे तरसत हरि दर्शन को ।
कहाँ छुपे हो जगत रचैया ,
चैन नहीं तन मन को ।
तरसत तरसत हरि दर्शन को ।
मोरे नैन बावरे तरसत………..
जगत जाल में उलझ गयो प्रभु ,
काटो इस उलझन को ।
तरसत तरसत हरि दर्शन को ।
मोरे नैन बावरे तरसत………..
भजन भाव नहिं कियो प्रभू जी ,
संगत कियो अधमन्ह को ।
तरसत तरसत हरि दर्शन को ।
मोरे नैन बावरे तरसत………..
भटकत बीती सारी उमरिया ,
आयो तेरी शरन को ।
तरसत तरसत हरि दर्शन को ।
मोरे नैन बावरे तरसत………..

 

रचनाकार

 


   ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र