संगठनों की गोपनीय आपात सभा…— डॉ. प्रशान्त करण

रामलाल जी ने बताया—”एक दिन कार्यदिवस पर पूरे स्थानों पर दिन के बारह बजते ही एकदम सन्नाटा छा गया। ऐसा लगा कि कर्फ्यू लग गया हो। सिर्फ रिक्शा, ऑटो वाले, खोमचे-रेहड़ी-पटरी वाले, सड़क के किनारे अतिक्रमण कर नाना प्रकार के चलंत दुकान लगाने वाले ही मेरी खिड़की से मुख्य सड़क पर दिख रहे थे।”

“हमने अपने मित्रों से दूरभाष पर जानकारी ली तो सुनकर चक्कर आ गया। पूरी राजधानी अचानक इसी नीरवता की चपेट में आ गई थी, लेकिन संध्या चार बजते-बजते सब कुछ पुनः सामान्य हो गया। चहुँ ओर पुनः चहल-पहल, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। खबरीलाल से कौतूहलवश संपर्क किया, वे प्रसन्नता के नशे में चुप्पी साध गए। मामला रहस्यमय लगने लगा।”

“पता चला कि विभिन्न व्यवसायों से जुड़े व्यापारी वर्ग, अधिकारियों, विभिन्न दलों के नेताओं ने आपसी मतभेद भुलाकर एक आपात, आकस्मिक और गोपनीय बैठक कर ली। फिर उन सबके अलग-अलग शीर्ष नेताओं ने भी बैठक की और सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित हुआ। इस प्रस्ताव का अक्षरशः पालन करने की सौगंध सभी ने अलग-अलग त्वरित गति से बैठक कर ली। इसके बाद पूरे समर्थ समाज में प्रसन्नता छा गई। रात होते-होते खबरीलाल ने नशे में टुन्न होकर बता दिया कि पूरे राष्ट्र में यही सब हुआ है। एक गोपनीय मामले का हल ढूँढा गया है।”

“इन अति गोपनीय बैठकों के उद्देश्य के बारे में पूछने पर उन्होंने बक दिया कि ‘दिल्ली में एक अति सम्माननीय और आच्छादित महोदय के घर आग लगने और कमरे में रखे करोड़ों के नोटों के जलने की बात नहीं सुनी है क्या? उपाय तो करना पड़ेगा न! किसी घटना से सीख तो लेनी पड़ेगी।’ फिर अधिक पिलाने पर उन्होंने लिए गए गोपनीय संकल्प का आशय इस शपथ पर उगल ही दिया कि यह कदापि सार्वजनिक नहीं होना चाहिए।”

रामलाल जी ने फुसफुसाकर बताया कि संकल्प में उस घटना से ली गई सीख इस प्रकार है—

  1. घर के बाहर, मकान से सटे परिसर में ही एक फायरप्रूफ कमरा अवश्य बनाएं।

  2. उस कमरे में पहले से फायरप्रूफ खाली बोरियाँ रखें, जो समय पर काम आएं।

  3. परिसर के सीसीटीवी कैमरे को इस प्रकार सेट करें कि उस कमरे में आना-जाना दिखाई ही न दे।

  4. कमरे के पीछे, परिसर के बाहर जंगल-झाड़ अवश्य रहें, जिससे आवश्यकता पड़ने पर सामग्री जलाने में कोई कठिनाई न हो। झाड़ियों में पहले से छिपाकर ज्वलनशील पदार्थों का भरपूर भंडार रखा जाए।

  5. समय-समय पर कमरे में रखी बोरियों में भरी नगद संपत्ति ठिकाने लगाई जाती रहे।

  6. कमरे में बोरियों में संपत्ति किसी बाहरी, नए अति विश्वासपात्र व्यक्ति से ही रखवाएं और निकलवाएं।

  7. ऐसे ही कमरे नए, सुनसान स्थानों पर भी बनाए जाएं, जिसमें आने-जाने का नियंत्रण और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि इसकी गोपनीयता कभी भंग न हो और किसी को कभी पता न लगे कि स्वामित्व आपका है।

  8. अपने अज्ञात चार्टर्ड अकाउंटेंट को विशेष निर्देश दें कि नगदी की खपत शीघ्र कर दे और अधिक दिनों तक भंडारण न हो सके।

  9. इस संपत्ति भंडारण के काम में अपने पीए, स्टाफ, कार्यालय कर्मचारी या निकट संबंधियों पर कभी विश्वास न करें। सर्वदा विश्वासपात्र आउटसोर्स बाहरी, अनजान लोगों को लगाएं और उन्हें बराबर बदलते रहें।

  10. वसूली में भूलकर भी अपने फोन, लैपटॉप या कंप्यूटर का प्रयोग न करें।

  11. यदि विपरीत परिस्थिति में जाँच की अवस्था आए भी, तो इसके सदस्यों का पूर्वानुमान लगाकर उन संभावित लोगों को पूर्व से अनुग्रहित करते हुए उनके साक्ष्य रख लें।

  12. व्यवस्था में रहकर बाँटकर खाएँ।

  13. भयभीत होकर अनैतिक वसूली से संपदा एकत्र करने की प्रवृत्ति कदापि न छोड़ें, बल्कि पकड़े जाने पर बचने के उपाय की योजना पहले से तैयार रखें।

  14. स्मरण रहे, व्यवस्था में किसे कैसे प्रभावित करना है और किसकी क्या कमजोरी है, इसका पता रखें और इसके लाभ उठाने से न चूकें।

इतना कहकर खबरीलाल वहीं गिरकर सो गए। फिर मैं भागकर आपको पूरी बात बता रहा हूँ।

इतना कहकर रामलाल जी चले गए। जाते समय बड़बड़ा रहे थे—”बात पेट से निकल गई, अब जाकर पेट दर्द ठीक हुआ।”

सो सुना, सार्वजनिक किया, ताकि मेरे पेट में दर्द न रहे। बाकी पाठक अपना जानें।

— डॉ. प्रशान्त करण