आए कंत नहीं केहि कारन। …-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

आए कंत नहीं केहि कारन  —- कर सोलह श्रृंगार दुल्हनियां, करे पती इंतजार । आए कंत नहीं केहि कारन, बीते पाहर चार ।। किय कोई…

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मोदी की कूटनीति: संवाद, संयम और संकल्प का संगम

सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ भारत-पाकिस्तान संबंधों और हाल ही में संपन्न ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तीव्र प्रतिक्रियाएँ देखने को…

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रोवत बीते रैन….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

रोवत बीते रैन —- पिया बिनु रोवत बीते रैन । दिन में चैन मोहे नहिं आवै, निन्दिया रात न नैन । पिया बिनु रोवत बीते…

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गृहलक्ष्मी का आदर मान करो…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र

गृहलक्ष्मी का आदर मान करो —- वह पिता बड़ा बड़भागी है , जिसने बेटी को जनम दिया । पाला पोषा और बड़ा किया , अपरिमित…

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भारत-पाक युद्ध और पत्रकारिता: जब हर शब्द देश का प्रहरी हो

सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘    युद्ध का दौर है दोस्तो। गोलियां चल रही हैं, मिसाइलें दागी जा रही हैं, दुश्मन के इलाके में…

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थोड़ा “ज़िंदगी जीने की क्लास” भी ज़रूरी है

सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘  चलिए, सीधी बात करते हैं — हम सबने स्कूल और कॉलेज में खूब पढ़ाई की है। गणित में पसीना…

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