जब विवाह के पश्चात् सीता जी विदा होने लगीं तो वहाँ ऐसा कारुणिक दृश्य उपस्थित हो गया कि मनुष्य की कौन कहे पशु पक्षी भी…
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नाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारि….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रस्तुत है शरणागत भजन के रूप में मेरी ये रचना:—— नाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारि , नाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारी । मैं…
View More नाथ मैं तो आयो शरण तुम्हारि….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रश्री गणेश वन्दना….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
श्री गणेश वन्दना:—– जय गणेश गजबदन विनायक । जय जय जय हो जय गणनायक ।। शंकर सुवन भवानी नन्दन । काम क्रोध मद लोभ निकन्दन…
View More श्री गणेश वन्दना….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रमिर्जाचौकी हाट की बंदोबस्ती 13.5 लाख में, मंडरो हाट की बोली मेरी मुर्मू ने जीती
– करण बने मिर्जाचाैकी हाट 13,लाख 50 हजार में हुई बंदोबस्ती – मेरी मुर्मू बनी मंडराे हाट की बोली। 1लाख 25 हजार मैं हुई बंदोबस्ती…
View More मिर्जाचौकी हाट की बंदोबस्ती 13.5 लाख में, मंडरो हाट की बोली मेरी मुर्मू ने जीतीकन्हैया संग होली खेलो री सखी…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रस्तुत है मेरी रचना राधा कृष्ण की होली:—– कन्हैया संग होली खेलो री सखी, खेलो री सखी होली खेलो री सखी, कन्हैया संग होली… मलि…
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प्रस्तुत है मेरी रचना ब्रज की होली :——- आज बिरज लाले लाल भयो रसिया । खेलत फाग बिरज नर नारी, उड़त अबीर गुलाल मोरे रसिया…
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ऋतु बसन्त—— देखो ऋतु बसन्त आया है, कैसा मधुमय साज सजाए । सरसों ओढ़ी पीलि चुनरिया, लहर लहर लहराए । कोयल गावै राग बसन्ती, भँवरों…
View More देखो ऋतु बसन्त आया है…- ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रतुम्हारा स्वागत है ऋतुराज….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
स्वागत है ऋतुराज—— तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज । ओढ़ चुनरिया पीली सरसों, नाच रही है आज । अम्बुआ ऊपर छाये मंजरी, सजी है मधुमय साज…
View More तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रमधुमास राम जी जनमलें हो रामा….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
श्री राम जन्म के उपलक्ष्य में प्रस्तुत है मेरी ये रचना चैती के रूप में :——– मधुमास राम जी जनमलें हो रामा , अवध नगरिया…
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—: होली के दोहे :—- बरसे रंग चुनर भइ गीली , राधा मोहन खेलत होली । बरसाने में बरसत रंग , मोहन खेलत राधा संग…
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