अब नहिं शहर सुहात —- गावँ छोड़ कर शहर को आया , अब नहिं शहर सुहात । घुटन भरी यह जिन्दगी , कैसे पाउँ निजात…
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कहाँ गए वे दिन ? …-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
कहाँ गए वे दिन ? —- चारु चन्द्र की चंचल किरणें , बरस रही थीं आँगन में । खेल रहे थे लाल हमारे , आँख…
View More कहाँ गए वे दिन ? …-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रजाने कहाँ गए वो दिन…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
जाने कहाँ गए वो दिन —- जाने कहाँ गए वो दिन ??????? न बाग न बगिया न फूस की चटाई । न बरगद की छाँव…
View More जाने कहाँ गए वो दिन…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रकन्यादान…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
कन्यादान —- वह पिता बड़ा बड़भागी है , जिसने बेटी को जनम दिया । पाला पोषा और बड़ा किया , अपरिमित प्यार दुलार दिया ।…
View More कन्यादान…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रफेसबुक …..- ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
फेसबुक —- जुकरबर्ग ने दिया उपहार , सबके जीने का आधार । रहा न जाए बिना फेसबुक , हम सब करते इससे प्यार । दुनिया…
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आओ प्रिये —- प्यार का मौसम प्रिये, आया बहार लेकर । हैं पल्लवित पुष्पित तरू, यौवन खुमार लेकर । कोयल बुलावत हे प्रिये, कुहु कुहु…
View More आओ प्रिये….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रबाप का अरमान…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
बाप का अरमान —- बाप का अरमान था बेटा बने कुछ । दफन कर दी खुद के अरमानों को , यह सोच कर, बेटा बने…
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गजल —- दो कदम तुम भी चलो, दो कदम हम भी चलें । फासले ये जिन्दगी के, मिल के निपटाते चलें ।। दो कदम तुम…
View More दो कदम तुम भी चलो, दो कदम हम भी चलें …ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रमोह जनित अज्ञान …..-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
मोह जनित अज्ञान —- मोह जनित अज्ञान ते, मानव मन कलुषाय । मत्सरता की आग में, पल पल जरता जाय ।। मानव मन में मैल…
View More मोह जनित अज्ञान …..-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रपाकिस्तान, अब तो अपनी ब्लैक मनी को काम में ले ही लो!
-पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ एक ख्याल आया और मुस्कान छूट गई। फिर सोचा — हँसी में टाल देने जैसी भी नहीं है यह बात।…
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