प्रस्तुत है मेरी ये रचना जिसमें मैने भगवान श्रीराम के कुछ अलौकिक चरित्रों का वर्णन किया है :—— रघुबीर तुम्हारे चरित अलौकिक, गावहिं जग के…
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Web Journalists’ Association of India (WJAI) बिहार प्रदेश कमिटी का विस्तार
Web Journalists’ Association of India (WJAI) बिहार प्रदेश कमिटी का विस्तार: संगठन को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की तैयारी पटना। Web Journalists’ Association of…
View More Web Journalists’ Association of India (WJAI) बिहार प्रदेश कमिटी का विस्तारपरब्रह्म धरी पावन नर देही ……- ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
परब्रह्म धरी पावन नर देही . (सवैया – प्रथम) दशरथ कौशल्या के प्रेम के वश, परब्रह्म धरी पावन नर देही । बहु बाल चरित्र करी…
View More परब्रह्म धरी पावन नर देही ……- ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रभजहु राम चरनन मोरे भाई….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
कागभुषुण्डी जी गरूड़ जी से ज्ञान और भक्ति का निरूपण करते हुए कहते हैं कि हे गरूड़ जी बिना भजन के श्रीराम जी रीझते नहीं…
View More भजहु राम चरनन मोरे भाई….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रश्रीमन् नारायण नारायण हरी हरी……….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रभु श्रीराम ने जब रावण का वध कर दिया तब सब देवता मुनि आए और प्रभु की स्तुति करने लगे। प्रभु के प्रति कृतज्ञता प्रकट…
View More श्रीमन् नारायण नारायण हरी हरी……….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्ररावण बिना श्री राम की…….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
कागभुषुण्डी जी गरूड़ जी से भक्ति के विषय में वर्णन करते हुए कहते हैं कि हे गरूड़ जी भक्ति के बिना मनुष्य का शरीर शव…
View More रावण बिना श्री राम की…….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रराम बिन गोदिया सूनी री सखिया….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रभु श्रीराम वन में चले गए हैं। माता कौशल्या विरह में ब्याकुल हो कर बिलाप कर रही हैं। माता कौशल्या की विरह वेदना पर प्रस्तुत…
View More राम बिन गोदिया सूनी री सखिया….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रप्रगट भए रघुरैया….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रभु श्रीराम का प्राकट्य हुआ है, अयोध्या में उत्सव मनाया जा रहा है। तीनों माताएँ बालक राम की बार बार बलैया ले रहीं हैं। राजा…
View More प्रगट भए रघुरैया….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रसाँवरे की लगन मोहे लागी…..-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
प्रभु के चरण में जिनकी लगन लग गई वो भवसागर पार उतर गया । इसी प्रसंग पर प्रस्तुत है मेरी ये रचना :——- साँवरे की…
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प्रस्तुत है शरणागत भजन के रूप में मेरी ये रचना :——- प्रभु बिनु नहिं कोउ, शरणागत हितकारी । आरत बचन सुनी द्रौपति की , राखी…
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