हर पीढ़ी इतिहास पर अपनी छाप छोड़ती है। कुछ पीढ़ियों को देश बनाने, कुछ को युद्ध लड़ने, कुछ को आर्थिक बदलाव लाने और कुछ को सामाजिक बदलाव लाने के लिए याद किया जाता है। Gen Z के नाम से जानी जाने वाली पीढ़ी को शायद किसी अलग वजह से याद किया जाएगा। यह इंसानी इतिहास की पहली ऐसी पीढ़ी है जो ऐसी दुनिया में बढ़ी हुई है जहाँ कनेक्टिविटी कोई खास सुविधा नहीं, बल्कि जिंदगी का एक तरीका है।
पिछली पीढ़ियों ने दुनिया को सीमित नजरिए से देखा। जानकारी अखबारों, किताबों, रेडियो, टेलीविजन और आमने-सामने की बातचीत से मिलती थी। ज्ञान धीरे-धीरे फैलता था। लोगों की राय धीरे-धीरे बनती थी। दूर की जगहों की खबरें स्थानीय बातचीत का हिस्सा बनने में अक्सर कई दिन, हफ्ते या महीने भी ले लेती थी। लेकिन Gen Z के लिए दुनिया ‘रियल टाइम’ में मौजूद है। काठमांडू, नई दिल्ली, लंदन या न्यूयॉर्क में हुई कोई घटना कुछ ही मिनटों में किसी छोटे शहर की बातचीत का हिस्सा बन सकती है।
इस बेमिसाल कनेक्टिविटी ने एक ऐसी पीढ़ी को जन्म दिया है जो पहले की किसी भी पीढ़ी जैसी नहीं है। Gen Z सिर्फ टेकलॉजी से नहीं जुड़ी है। यह दुनिया भर की जानकारी, विचारों, मौकों, संस्कृतियों और बहसों से जुड़ी है। इससे भी जरूरी बात यह है कि यह भूगोल, भाषा और सामाजिक पृष्ठभूमि की पारंपरिक सीमाओं से परे लोगों से जुड़ी है। स्मार्टफोन इस बदलाव की सबसे बड़ी पहचान बन गया है। यह अब सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं रहा। यह एक क्लासरूम, न्यूजरूम, बाजार, मनोरंजन का केंद्र, राजनीतिक मंच और काम करने की जगह बन गया है। एक छोटी सी स्क्रीन के जरिए, युवा ऐसा ज्ञान हासिल करते हैं जिसकी पिछली पीढ़ियाँ सिर्फ कल्पना ही कर सकती थी। वे नई रिकल्स सीखते, बिजनेस शुरू करते हैं, अपनी राय रखते हैं और ऐसी चर्चाओं में हिस्सा लेते हैं जो राष्ट्रीय सीमाओं से परे होती है। इस बदाव के नतीजे बहुत गहरे है। पहली बार, एक ऐसी पीढ़ी बड़ी हो रही है। जिसके पास हर चीज की तुलना करने की क्षमता है। शिक्षा व्यवस्था, रोजगार केक मौके, सरकारी नीतियाँ, शासन के तरीके और सामाजिक रुझान लगातार दिखाई देते हैं। युवा अब अपनी परिस्थितियों का आकलन सिर्फ स्थानीय हकीकत के आधार पर नहीं करते। वे उनकी तुलना दूसरी जगहों की संभावनाओं से करते हैं। तुलना करने का यह कल्चर उम्मीदों पर असर डाल रहा है। जो नागरिक यह देख सकते हैं कि दूसरे समाज कैसे काम करते हैं, वे अपने आस-पास के संस्थानों से कुशलता, पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग ज्यादा करते हैं। सरकारी, बिजनेस और शिक्षण संस्थानों को अब सिर्फ उनके वादों से नहीं, बल्कि उनके काम से भी आंका जा रहा है।
Gen Z का असर टेकनोलॉजी से कहीं ज्यादा है। यह समाज के सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा करने के तरीके को बदल रही है। क्लाइमेट चेंज, मेंटल हेल्थ, जेंडर इक्वालिटी, एंटरप्रेन्योरशिप, डिजिटल राइट्स और सोशल जस्टिस जैसे मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दिया जाने लगा है क्योंकि युवा पीढ़ी ने इन्हें मुख्यधारा की बातचीत का हिस्सा बनाया है। जहाँ पिछली पीढ़ियों ने शायद कभी-कभार ही इन मुद्दों पर चर्चा की हो, वहीं ‘जेन जेड’ (Gen Z) ने इन्हें रोजमर्रा की सार्वजनिक बातचीत का हिस्सा बना दिया है। राजनीतिक भागीदारी में भी काफी बदलाव आया है। पारंपरिक राजनीति अक्सर पार्टी के प्रति वफादारी, विचारधारा और विरासत में मिली पसंद पर आधारित होती थी। आज के युवा नागरिक अलग तरह से काम करते हैं। उनके पास अलग-अलग नजरिए और जानकारी के कई स्रोत उपलब्ध है। नतीजतन, वे अक्सर पुरानी धारणाओं पर सवाल उठाने और लंबे समय से चली आ रही मान्याओं पर फिर से विचार करने के लिए ज्यादा तैयार रहते हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि ‘जेन जेड’ की आवाज एक ही है। यह एक विविध पीढ़ी है जो अलग-अलग आर्थिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय अनुभवों से बनी है। महानगर में रहने वाले छात्र की प्राथमिकताएँ ग्रामीण समुदाय के युवा की प्राथमिकताओं से बहुत अलग हो सकती है, फिर भी, वे कनेक्टिविटी के एक साझा माहौल से जुड़े हुए हैं जो दुनिया को समझने के उनके नजरिए को प्रभावित करता है। इस पीढ़ी का असर अलग-अलग देशों में चल रहे जन-आंदोलन में साफ दिखता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने नागरिकों को बहुत तेजी से संगठित होने, बातचीत करने और एकजुट होने में मदद की है। विचार तेजी से फैलते हैं। अभियान तेजी से जोर पकड़ते हैं जो सार्वजनिक बातचीत पहले स्थानीय स्तर तक सीमित रहती थी, वह अब राष्ट्रीय और यहाँ तक कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींच सकती है। भागीदारी को सीमित करने वाली पुरानी बाधाएँ अब काफी कमजोर हो गई है। शिक्षा भी एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें बदलाव आ रहा है। पिछली पीढ़ियाँ सीखने के लिए पूरी तरह से औपचारिक संस्थानों पर निर्भर रहती थीं। आज, युवा क्लासरूम की शिक्षा की शिक्षा के साथ-साथ ऑनलाईन कोर्स, डिजिटल संसाधनों और वैश्विक ज्ञान नेटवर्क का भी इस्तेमाल करते हैं। सीखना अब किसी एक जगह तक सीमित नहीं रह गया है। यह लगातार चलने वाली और आसानी से उपलब्ध होने वाली प्रक्रिया बन गई है। काम करने की जगह भी बदल रही है। ‘जेन जेड’ (Gen Z) के युवा तेजी से हो रही तकनीकी तरक्की के दौर में वयस्क हुए हैं। कई युवा पेशेवर अपने से पहले की पीढ़ी के लोगों की तुलना में करियर को अलग नजरिए से देखते हैं। वे उद्यमिता, रिमोर्ट वर्क (दूर से काम करना), फ्रीलांस मौकों और तकनीक पर आधारित पेशों को अपनाने के लिए ज्यादा तैयार रहते हैं। सफलता को अब सिर्फ नौकरी के पद से नहीं, बल्कि लचीलेपनर, रचनात्मकता और असर से भी मापा जाता है।
फिर भी, ‘जेन जेड’ (Gen Z) की कहानी चुनौतियों से खाली नहीं है। कनेक्टिविटी से मौके तो मिलते हैं, लेकिन इससे दबाव भी बनता है। लगातार जानकारी के संपर्क में रहने से चिंता और जानकारी की अधिकता (Information overload) जैसी समस्याएँ हो सकती है। सोशल मीडिया तुलना की भावना को बढ़ावा दे सकता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। डिजिटल संचार की रफ्तार की वजह से कभी-कभी गलत जानकारी भी तथ्यों की तरह ही तेजी से फैल जाती है। इस पीढ़ी के लिए चुनौती सिर्फ जानकारी तक पहुँच बनाना नहीं है, बल्कि यह सीखना भी है कि जिम्मेदारी के साथ उसका मूल्यांकन कैसे किया जाए।
यह सच्चाई एक अहम बात को उजागर करती है। तकनीक अपने आप में न तो कोई समाधान है और न ही कोई समस्या। इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है। कनेक्टिविटी लोकतंत्र, शिक्षा और इनोवेशन को मजबूत कर सकती है, लेकिन अगर इसके साथ आलोचनात्मक सोच और जिम्मेदार भागीदारी न हो, तो यह बँटवारे को भी बढ़ा सकती है। शायद ‘जेन जेड’ (Gen Z) का सबसे बड़ा योगदान यह है कि इसने भागीदारी का दायरा बढ़ाया है। अब ज्यादा लोग उन बातचीत में हिस्सा ले सकते हैं जो पहले सिर्फ विशेषज्ञों, संस्थानों और प्रभाव वाले पारंपरक केंद्रों तक सीमित थी। जिन लोगोकं की आवाज पहले अनसुनी रह जाती थी, उन्हें अब ऐसे प्लेटफॉर्म मिल गए हैं जिनके जरिए वे ज्यादा लोगों तक अपनी बात पहुँचा सकते हैं संचार का यह लोकतंत्रीकरण इक्कीसवी सदी की सबसे अहम घटनाओं में से एक साबित हो सकता है। जैसे-जैसे ‘जेन जेड’ (Gen Z) के युवा बिजनेस, सकरार, शिक्षा और नागरिक समाज में नेतृत्व की भूमिकाओं में आ रहे हैं, उनका प्रभाव बढ़ता जाएगा। उनके फैसले आने वाले दशकों में अर्थव्यवस्था, तकनीक, सार्वजनिक संस्थानों और सामाजिक रीजि-रिवाजों को आकार देंगे। भविष्य के इतिहासकार शायद इस दौर को एक अहम मोड़ के तौर पर देखें, जब कनेक्टिविटी एक तकनीकी घटना से बदलकर एक अहम सामाजिक ताकत बन गई। हर पीढ़ी को एक ऐसी दुनिया मिलती है जिसे उससे पहले की पीढ़ियों ने बनाया होता है। ‘जेन जेड’ (Gen Z) को एक ऐसी दुनिया मिली है जो आपस में जुड़ी हुई है। उनके सामने चुनौती जुड़ा हुई यह पक्का करना है कि यह जुड़ाव बंटवारे के बजाय तरक्की का जरिया बने, झगड़े के बजाय समझ-बूझ का जरिया बने और ध्यान भटकाने के बजाय नई खोजों का जरिया बने। हो सकता है कि इतिहास ‘जेन जेड’ (Gen Z) को सिर्फ इसलिए याद न रखें कि उन्होंने टेक्नालॉजी को अपनाया, बल्कि इसलिए याद रखे कि वे ऐसी पहली पीढ़ी थे जिन्होंने सच में आपस में जुड़ी दुनिया में जीना, सीखना, काम करना और समाज में हिस्सा लेना सीखा। उनकी कहानी अभी लिखी जा रही है, लेकिन उनके असर को नजरअंदाज करना नामुमकिन है। वे दुनिया को एक ग्लोबल कम्युनिटी के तौर पर समझते हैं। फिर भी, किसी बड़े शहर में रहने वाले युवा की अपनी अलग राय हो सकती है। यह एक विविधता वाला पीढ़ी है। जानकारी और सोच के मामले में वे अलग हैं। नतीजतन, आज के नागरिक अलग तरह से काम करते हैं। पारंपरिक राजनीति अक्सर अलग तरह से बनी थी। कभी-कभी, ‘जेन जेड’ (Gen Z) ने मुद्दों और इस तरह समाज के सोचने-समझने के तरीके को बदला है जिसका प्रभाव भारत के लोकतंत्र पर प्रभावित हुआ है।
लेखक : डॉ० सहदेव राम नेशनल गोल्ड मेडलीस्ट पदम् अवार्ड से सम्मानित मो.नं.- 7979809385

