– Purnendu Pusshpesh 10 अक्टूबर को CJP के तथाकथित आंदोलन के दौरान जो तस्वीर सामने आई, वह उन लोगों के लिए एक स्पष्ट संदेश है…
View More देश ने नकारा अराजकता का एजेंडा, अब राष्ट्रहित के साथ खड़े होने का समयCategory: National
वर्दी को अपमान से बचाना होगा, पुलिस की संवैधानिक ताकत बढ़ानी होगी
– Purnendu Pusshpesh कानून का राज तभी कायम रह सकता है, जब कानून लागू कराने वाली संस्था खुद भय और दबाव से मुक्त हो। जिस…
View More वर्दी को अपमान से बचाना होगा, पुलिस की संवैधानिक ताकत बढ़ानी होगी25 साल का मोदी युग : बदली राजनीति, बदला भारत का आत्मविश्वास
– Purnendu Pusshpesh नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों को देखें तो उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि को केवल सड़कों, योजनाओं, अर्थव्यवस्था या विदेश…
View More 25 साल का मोदी युग : बदली राजनीति, बदला भारत का आत्मविश्वासदेश पहले या राजनीतिक सुविधा?
– PURNENDU PUSSHPESH आतंकवाद के सामने सबसे पहले साफ खड़ा होना पड़ता है। वहां शब्दों में अगर मगर शुरू हो जाए, तो सवाल सिर्फ राजनीतिक…
View More देश पहले या राजनीतिक सुविधा?जीएसटी की अगली परीक्षा: कर संग्रह नहीं, करदाता का भरोसा
= Purnendu Pusshpesh जीएसटी को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आलेख एक ऐसी कर व्यवस्था की दिशा दिखाता है, जिसका मकसद सिर्फ सरकार का…
View More जीएसटी की अगली परीक्षा: कर संग्रह नहीं, करदाता का भरोसाडॉ. अच्युत सामंत को रोमानिया के नगर की मानद नागरिकता, कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित
भुवनेश्वर: प्रख्यात शिक्षाविद्, समाज सुधारक तथा कीट,कीस और कीम्स के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत को शिक्षा, सामाजिक विकास और मानवीय सेवा के क्षेत्र में उनके…
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– editorial by Purnendu Pusshpesh भारत को विकसित और सुरक्षित राष्ट्र बनाना है तो पुलिस को केवल कानून लागू करने वाली ताकत के रूप में…
View More पुलिस को मजबूत किए बिना मजबूत भारत की कल्पना अधूरीजहां भाव चाहिए, वहां हम भाव लगाने बैठे हैं
– Purnendu Pusshpesh हमारे समय की एक अजीब आदत हो गई है। हम हर चीज का हिसाब लगाने लगे हैं। किससे कितना फायदा हुआ, किसने…
View More जहां भाव चाहिए, वहां हम भाव लगाने बैठे हैंकानून सबके लिए समान हो, यही लोकतंत्र की असली कसौटी है
– Purnendu Pusshpesh भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहां अलग-अलग धर्म हैं, अलग-अलग जातियां हैं, अलग-अलग भाषाएं हैं, अलग-अलग परंपराएं हैं और अलग-अलग…
View More कानून सबके लिए समान हो, यही लोकतंत्र की असली कसौटी हैJSSC-CGL से TDPL तक: परीक्षा रद्द, अब चयनितों की नौकरी पर फैसला जरूरी
संपादकीय : पूर्णेन्दु पुष्पेश – परीक्षा रद्द हुई तो नियुक्तियां भी हों निरस्त, युवाओं को मिले फिर मौका – TDPL विवाद का निर्णायक सवाल: पद पर रहेंगे…
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