पुलिस को मजबूत किए बिना मजबूत भारत की कल्पना अधूरी

– editorial by Purnendu Pusshpesh भारत को विकसित और सुरक्षित राष्ट्र बनाना है तो पुलिस को केवल कानून लागू करने वाली ताकत के रूप में…

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जहां भाव चाहिए, वहां हम भाव लगाने बैठे हैं

– Purnendu Pusshpesh  हमारे समय की एक अजीब आदत हो गई है। हम हर चीज का हिसाब लगाने लगे हैं। किससे कितना फायदा हुआ, किसने…

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यूपीआई की कीमत नहीं, भरोसे की कीमत समझनी होगी

-पूर्णेन्दु पुष्पेश भारत में डिजिटल भुगतान की कहानी लिखी जाए तो यूपीआई उसका सबसे बड़ा अध्याय होगा। कुछ साल पहले तक जेब में नकदी रखना…

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कानून सबके लिए समान हो, यही लोकतंत्र की असली कसौटी है

– Purnendu Pusshpesh भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहां अलग-अलग धर्म हैं, अलग-अलग जातियां हैं, अलग-अलग भाषाएं हैं, अलग-अलग परंपराएं हैं और अलग-अलग…

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ब्रिक्स की थाली से बड़ा है भारत का कद

– Purnendu Pusshpesh नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन हुआ। दुनिया के कई बड़े उभरते देशों के नेता भारत आए। दो-चार घंटे की बैठक करके चले…

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हिन्दी को सम्मान हमारे रोजमर्रा के व्यवहार से मिलेगा

– पूर्णेन्दु पुष्पेश 14 सितंबर आते ही हिन्दी के प्रति हमारा प्रेम अचानक जाग जाता है। सरकारी कार्यालयों में हिन्दी दिवस मनाया जाता है, स्कूलों…

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आरक्षण सहारा बने, मेधावी युवाओं के लिए दीवार नहीं

Editorial by Purnendu Pusshpesh प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले झारखंड और बिहार के लाखों युवाओं के लिए परीक्षा सिर्फ परीक्षा नहीं होती। इसके पीछे…

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शिक्षक जागेगा, तभी पीढ़ी संस्कारित होगी

– पूर्णेन्दु पुष्पेश बीते दिनों देश में जेन-जी यानी नई पीढ़ी के आंदोलन और उनके कई रूप देखने को मिले। कहीं युवाओं का गुस्सा लोकतांत्रिक…

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स्वतंत्रता और स्वच्छंदता

सम्पादकीय : पूर्णेन्दु पुष्पेश स्वतंत्रता मनुष्य और समाज की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है, लेकिन स्वतंत्रता का अर्थ स्वच्छंदता नहीं है। दोनों शब्द…

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खजाना सिकुड़ा, विकास की रफ्तार पर सवाल

– Purnendu Pusshpesh   झारखंड सरकार की वित्तीय तस्वीर इस समय ऐसी है, जिसे केवल “पैसा कम मिला” कहकर टाला नहीं जा सकता। चालू वित्तीय वर्ष…

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