कौन हो तुम ? —- सागर सी गहरी आँखों वाली , कौन हो तुम ये मुझे बता । सूरज की क्या प्रथम किरण हो ,…
View More कौन हो तुम ? …-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रAuthor: admin
थोड़ा “ज़िंदगी जीने की क्लास” भी ज़रूरी है
सम्पादकीय : पूर्णेन्दु सिन्हा ‘पुष्पेश ‘ चलिए, सीधी बात करते हैं — हम सबने स्कूल और कॉलेज में खूब पढ़ाई की है। गणित में पसीना…
View More थोड़ा “ज़िंदगी जीने की क्लास” भी ज़रूरी हैअब नहिं शहर सुहात…ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
अब नहिं शहर सुहात —- गावँ छोड़ कर शहर को आया , अब नहिं शहर सुहात । घुटन भरी यह जिन्दगी , कैसे पाउँ निजात…
View More अब नहिं शहर सुहात…ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रकहाँ गए वे दिन ? …-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
कहाँ गए वे दिन ? —- चारु चन्द्र की चंचल किरणें , बरस रही थीं आँगन में । खेल रहे थे लाल हमारे , आँख…
View More कहाँ गए वे दिन ? …-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रजाने कहाँ गए वो दिन…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
जाने कहाँ गए वो दिन —- जाने कहाँ गए वो दिन ??????? न बाग न बगिया न फूस की चटाई । न बरगद की छाँव…
View More जाने कहाँ गए वो दिन…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रकन्यादान…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
कन्यादान —- वह पिता बड़ा बड़भागी है , जिसने बेटी को जनम दिया । पाला पोषा और बड़ा किया , अपरिमित प्यार दुलार दिया ।…
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फेसबुक —- जुकरबर्ग ने दिया उपहार , सबके जीने का आधार । रहा न जाए बिना फेसबुक , हम सब करते इससे प्यार । दुनिया…
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आओ प्रिये —- प्यार का मौसम प्रिये, आया बहार लेकर । हैं पल्लवित पुष्पित तरू, यौवन खुमार लेकर । कोयल बुलावत हे प्रिये, कुहु कुहु…
View More आओ प्रिये….-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रबाप का अरमान…-ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
बाप का अरमान —- बाप का अरमान था बेटा बने कुछ । दफन कर दी खुद के अरमानों को , यह सोच कर, बेटा बने…
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गजल —- दो कदम तुम भी चलो, दो कदम हम भी चलें । फासले ये जिन्दगी के, मिल के निपटाते चलें ।। दो कदम तुम…
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